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वाराणसी

काशी में वायु प्रदूषण के खिलाफ एकजुट हुए धर्मगुरु, कहा जल नहीं तो कल नहीं, वायु नहीं तो हम नहीं

जानलेवा बन चुका है शहर में वायु प्रदूषण, जागरूकता ही एक मात्र साधन। हरियाली बढ़ाएं, सूर्य की सिर्फ उपासना नहीं उसकी ऊर्जा का प्रयोग करें।

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वाराणसी. शहर के धर्मगुरु बुधवार को एक मंच पर आए। यह मंच किसी धार्मिक मुद्दे पर विचार विमर्श के लिए नहीं था। ना कोई सियासी मुद्दा था। मसला था शहर की जहरीली होती आबोहवा। इस मौके पर धर्मगुरुओं ने अपने-अपने धर्म का बखान तो किया पर मकसद शहर की बदतर होती आबो हवा को महफूज रखने तक ही सीमित था। इस मौके पर सभी एकमत थे कि शहर में ज्यादा से ज्यादा सौर ऊर्जा का प्रयोग हो। सूर्य की सिर्फ उपासना न हो बल्कि उनकी ऊर्जा का इस्तेमाल दैनिक जीवन में किया जाए। घर की बिजली जलानी हो या आधुनिक संयंत्र का संचालन हो सब कुछ सौर ऊर्जा से ही हो। इस मौके पर आपसी सहयोग की बात भी उठी। हालांकि इस बात पर आम सहमति नहीं बन सकी। धर्मगुरुओं ने स्वच्छता अभियान को भी वायु प्रदूषण पर अंकुश के लिए कारगर हथियार माना और कहा कि अगर चारों तरफ साफ-सफाई हो तो ही काफी हद तक वायु प्रदूषण पर नियंत्रण किया जा सकता है। इस मौके पर धर्मगुरुओं की सहमति से सौर ऊर्जा से वायु प्रदूषण दूर करने की शपथ भी ली गई।

बता दें कि शहर की बदतर होती आबो हवा पर क्लाइमेट एजेंडा (केयर 4 एयर) और 100 प्रतिशत उत्तर प्रदेश अभियान लंबे अरसे से जागरूकता अभियान चला रहा है। ये दोनों ही संस्थाएं पत्रिका के वायु प्रदूषण अभियान में भी बराबर की साझीदार रही हैं। उस साझा अभियान के तहत ही बुधवार को यह आयोजन किया गया था। यहां यह भी बता दें कि पत्रिका ने लगातार वाय प्रदूषण पर खबरें प्रसारित कर लोगों को सतर्क करने की कोशिश की है चाहे वह बारातों हो या तमाम उत्सवों में आतिशबाजी का विरोध हो या कूड़े में आग लगाने का मसला हो। पत्रिका ने शहर के विभिन्न चिकित्सकों की राय भी हासिल की है कि किस तरह से शहर की जहरीली होती आबो हवा इंसान की सेहत को प्रभावित हो कर रही है। केवल सांस की दिक्कत ही नहीं हो रही है इससे बल्कि इससे काली सूखी खांसी, आंखों में जलन व लालिमा के साथ चर्म रोग भी हो रहे हैं। पत्रिका ने इन मुद्दों पर जिला प्रशासन और नगर निगम प्रशासन की भूमिका पर भी सवालिया निशान खड़ा किया है। उसी कड़ी में बुधवार को यह धर्म संसद का आयोजन काशी की आबो हवा को मुफीद रखने में काफी सार्थक प्रयास रहा।

इस मौके पर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से प्रो. सुधाकर मिश्र, सूफी संत मौलाना हारुन नक्शबंदी, नीचीबाग गुरुद्वारे के ग्रंथी अमनप्रीत सिंह, जैन धर्मगुरु डॉ कमलेश कुमार जैन, फादर जेरोम सिल्वेस्टर, शीलवंश थेरो, प्रमोद कुमार आर्य आदि मौजूद रहे। अंतर्धार्मिक संवाद की शुरूआत करते हुए फादर आनंद ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने हाल ही में घोषित सौर ऊर्जा नीति में 2022 तक कुल 10,700 मेगावाट बिजली बनाने का लक्ष्य रखा गया है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगर इन सारे लक्ष्यों को हासिल कर लिया गया तो इससे आने वाले वर्षों में कुल एक करोड़, 56 लख, 69 हजार 25 टन कार्बन उत्सर्जन कम किया जा सकता है। उन्होने बताया कि इस नीति के तहत अपने घरों की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने पर सरकार की ओर से 15,000 रुपये प्रति क्विंटल का अनुदान घोषित किया गया है। साथ ही घरोरं में लगे संयंत्र से आवश्यक मात्रा से अधिक बिजली का उत्पादन होने की स्थिति में इसे ग्रिड बेचे जा सकने का भी प्रावधान है।

जैन धर्मगुरु डॉ कमलेश ने वायु प्रदूषण रोकने के लिए अधिक से अधिक पौधरोपण का संदेश दिया। कहा कि जल नहीं तो कल नहीं पर वायु नहीं तो हम नहीं। कहा कि वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वनों की कटान है। एक तरफ पेड़ों को काटा जा रहा दूसरी तरफ जनसंख्या में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। दरअसल प्रदूषण हमारी खुद की देन है इसे हमें ही दूर करना होगा। जन-जन को अपने गिरेबां में झांकना होगा, फिर से प्रकृति से जुड़ना होगा। नीचीबाग गुरुद्वारे के ग्रंथी अमनप्रीत ने कहा कि गुरुबानी में नानक साहेब ने 300 साल पहले ही वायु की प्रधानता बता दी थी। उन्होंने वायु की तुलन? गुरु ु से की है जबकि पानी की माता से। ऐसे में हम सभी के धर्म ग्रंथों में प्रकृति प्रेम का संदेश है हम मानें तब तो।

ये भी थे मौजूद

इस मौके पर फादर स्नेहानंद, डॉ इंदु, जागृति राही, मां भारती, डॉ आनंद प्रकाश तिवारी, अनूप श्रमिक, मुकेश उपाध्याय, फादर दयाकर, महेंद्र राठौर, मुकेश झांझरवाला, एकता शेखर, फादर सी थामस, सिस्टर तारा, सुचिता, गरिमा सिंह, शिवा, नेहा, शाइना आदि मौजूद रहे। सतीश सिंह ने आभार जताया।