
मायावती और योगी आदित्यनाथ
वाराणसी/इलाहाबाद. दलित नेता और भीम आर्मी के प्रमुख चन्द्रशेखर आजाद के रिहा होने के बाद बाद अब योगी सरकार को एक और बड़ा झटका लगा है। जल्द ही बहुजन समाज पार्टी का दिग्गज नेता और मायावती का बेहद करीबी नेता भी जेल से बाहर आ जाएगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार को बसा नेता पर से रासुका हटाकर उन्हें जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। बसपा नेता पर दलितों के भारत बंद के मौके पर दो अप्रैल को मेरठ में हुई हिंसा के आरोप में योगी सरकार ने रासुका लगाकर जेल भेज दिया था।
बताते चलें कि भीम आर्मी के प्रमुख चन्द्रशेखर ने जेल से रिहा होते ही दावा किया कि सरकार ने सुप्रीम केार्ट के दबाव में मुझे रिहा किया है। इसके बाद से वह लगातार न सिर्फ सत्ता विरोधी बयान दे रहे हैं बल्कि, महागठबंधन के साथ मिलकर 2019 में बीजेपी को हराने की बात भी कह दी है। इन सबके बावजूद योगी सरकार खामोश, लेकिन नजर बनाए हुए है। कौशाम्बी में एक सवाल के जवाब में तो डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने यहां तक कह दिया कि जिस तरह से जेल से बाहर आए हैं फिर अंदर जा भी सकते हैं।
अभी सरकार चन्द्रशेखर की रिहाई के बाद की परिस्थितियों से जूझ ही रही थी कि बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार को झटका देने वाला एक और फैसला दे दिया। बीते दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान मेरठ में हुई हिंसा के मामले में योगी सरकार ने जिस बसपा नेता और पूर्व विधायक को रासुका लगाकर जेल में डाल दिया था, हाईकोर्ट ने उसपर से रासुका हटाकर रिहा करने का आदेश दे दिया है।
गौरतलब हो कि बसपा नेता और पूर्व विधायक योगेश वर्मा दो अप्रैल को आंदोलन से जुड़े थे साथ में उनके भाई राजन वर्मा भी थे। इस दौरान मवाना के बाद मोदीपुरम से शुरू हुआ बवाल रोहआ रोड और कांकरखेड़ा तक पहुंचा। आरोप है कि इस दौरान योगेश वर्मा के समर्थक बवाल में आगे-आगे रहे। शासन से मिले निर्देश के बाद बसपा नेता योगेश वर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, इसके बाद उनपर रासुका लगा दिया गया।
Updated on:
20 Sept 2018 01:31 pm
Published on:
20 Sept 2018 01:31 pm
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