
बाबा विश्वनाथ चल प्रतिमा, pc- श्री काशी विश्वनाथ मंदिर
वाराणसी: काशी में रंगों की छठा शिवरात्रि के दिन से ही शुरू हो जाती है, लेकिन यहां एक दिन ऐसा भी रहता है, जब बाबा खुद अपने भक्तों के साथ होली खेलते है। रंगभरी एकादशी के दिन बाबा की चल प्रतिमा अपने परिवार के साथ निकलती है और इस दौरान भक्त रंग और गुलाल से महादेव के साथ होली खेलते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती का इसी दिन गौना होता है।
रंग भरी एकादशी के दिन काशी में ब्रज का भी रंग देखने को मिला। भगवान शिव के गौने की रस्म में काशी और ब्रज के लोग बाबा विश्वनाथ के दरबार में रंग, अबीर और फूलों से होली खेलते नजर आए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ अपने विवाह के बाद रंगभरी एकादशी पर माता गौरा का गौना लेकर आते हैं। काशी के लोग इस दौरान भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के चरणों में रंग और अबीर अर्पित करके होली खेलने की अनुमति मांगते हैं और इसके बाद काशी में पारंपरिक होली की शुरुआत हो जाती है।
रंगभरी एकादशी के इस पर्व पर श्री काशी विश्वनाथ धाम और श्री कृष्ण जन्म स्थान के मध्य सांस्कृति और उपहार का आदान-प्रदान भी किया गया, जो दोनों स्थानों के बीच प्राचीन धार्मिक संबंधों को दर्शाता है। परंपरा के अनुसार पूर्व महंत के आवास से डमरू की आवाज की गड़गड़ाहट के बीच बाबा माता गौरा के गौना के लिए पूरे परिवार के साथ निकलते हैं और इस दौरान काशी के लोगों के साथ रंग अबीर और फूलों से होली खेलते हैं।
रंगभरी एकादशी पर वर्षों से चली आ रही इस परंपरा का निर्वाह किया गया। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि बाबा की चल प्रतिमा के साथ आने वाली श्रद्धालुओं की संख्या सीमित की गई थी। इस बार केवल 64 लोगों की ही अनुमति दी गई और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया। लोकाचार और सांस्कृतिक परंपरा के अनुसार, चल प्रतिमा बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह में विराजमान हुई, जहां आरती, पूजन और मांगलिक कार्यक्रम संपन्न होंगे।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बताया कि बाबा विश्वनाथ के धाम से मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्म स्थान के लिए अबीर, गुलाल, खिलौने, चॉकलेट, वस्त्र और अन्य पूजन सामग्री भेजी गई है। काशी में रंगभरी एकादशी के अवसर पर पहली बार ब्रज के रसियारों द्वारा रास और फूलों की होली का भव्य आयोजन किया गया। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए ठंडाई जलपान और प्रसाद की भी व्यवस्था की गई।
Published on:
27 Feb 2026 06:40 pm
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