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BHU girl student ने प्रोफेसर पर लगाए अश्लीलता व मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप

-छात्रा का आरोप- प्रोफेसर कई महीने से सेक्सुवल व मेंटल टार्चर कर रहे थे-कुलपति से की शिकायत तो मामला पहुंचा वूमेन ग्रीवांस सेल-वूमेन ग्रीवांस सेल में दोनों पक्षों के बयान दर्ज-मामले को रफा-दफा किया गया-ग्रीवांस सेल की मीटिंग के बाद प्रोफेसर पर छात्र के खिलाफ कैंपेन चलाने का आरोप

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पीड़ित छात्रा की प्रतीकात्मक फोटो

पीड़ित छात्रा की प्रतीकात्मक फोटो

वाराणसी. एक तरफ संसद में सपा सांसद आजम खां के विवादित बयान को लेकर पूरे देश के राजनीतिक हलको में तूफान खड़ा हो गया है। महिला सांसदों ने मिल कर एक स्वर से सपा सांसद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं छात्राओं को लेकर अक्सर विवादों में रहने वाले बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एक नया मामला सामने आया है। इसके तहत एक शोध छात्रा ने विभागाध्यक्ष पर शारीरिक बनावट को लेकर अश्लील कमेंट करने तथा मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। यहां तक कि छात्रा की शिकायत पर ग्रीवांस सेल की चेयरपर्सन ने दोनों पक्षों को बुला कर एकबारगी मामले को रफा-दफा भी करा दिया। छात्रा का आरोप है कि उसके बाद प्रोफेसर अपनी शोध छात्राओं से मेरे खिलाफ न केवल संकाय बल्कि सोशल मीडिया पर भी कैंपेन चलवा रहे हैं। पीड़ित छात्रा इसे लेकर काफी गंभीर है। उसका कहना है कि ग्रीवांस सेल में सारी बात होने के बाद मेरा नाम लेकर जो कैंपने चलाया जा रहा है उसके खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन को गंभीर रुख अख्तियार करना चाहिए।

पीड़ित छात्रा ने बताया कि वैसे तो यह सब अप्रैल से ही चल रहा है पर मैने 7 जुलाई को कुलपित प्रो राकेश भटनागर से मिल कर शिकायत की थी। शिकायत को संज्ञान में लेते हुए उन्होंने मामले को वूमेंस ग्रिवांस सेल भेज दिया था। ग्रिवांस सेल ने मामले की जांच शुरू भी कर दी। छात्रा का आरोप है कि अटेंडेंस के नाम पर प्रोफेसर अपने कक्ष में बुलाया करते थे जबकि नियमतः उपस्थिति पंजिका सामान्य ऑाफिस में रहती है। लेकिन मैं नहीं कई ऐसी छात्राएं हैं जो इससे पीड़ित हैं। लेकिन उन्होंने मेरा न केवल सेक्शुअल बल्कि ऐसा मानसिक उत्पीड़न किया। मैं अस्पताल तक पहुंच गई। कई दिनों तक परिसर स्थित स्टूडेंट हेल्थ सेंटर में आना-जाना लगा रहा। एक दिन कुछ घंटों के लिए भर्ती भी होना पड़। छात्रा ने कई और गंभीर आरोप भी लगाए हैं। अब यह मामला विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा का विषय बना है। इसे सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल किया जा रहा है।

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हालांकि इस मामले में आरोपी प्रोफेसर ने छात्रा के आरोप को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को छात्रा की उपस्थिति कम होने से जोड़ते हुए कहा है कि उपस्थिति को लेकर टोकने पर ही यह आरोप लगाया गया है। इस संबंध में छात्रा का कहना है कि उसकी उपस्थिति पूरी थी। उसने अपनी उपस्थिति का ब्योरा भी प्रस्तुत कर दिया। बावजूद इसके वह इस तरह का आरोप लगा रहे हैं। इतना ही नहीं वह मीडिया में भी गलत बयानी कर रहे हैं।

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हालांकि इस प्रकरण पर पीड़ित छात्रा ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि यह मामला अप्रैल से ही चल रहा है। आरोपी प्रोफेसर लगातार मानसिक और शारीरक उत्पीड़न करते आ रहे थे। इसे लेकर मैं काफी स्ट्रेस थी। हालत यह थी कि कई बार बीएचयू स्टूडेंट हेल्थ सेंटर का चक्कर लगाना पड़ा। एक दिन तो दो घंटे के लिए मेैं एडमिट भी हुई। चिकित्सकीय परामर्श पर मेडिकल लीव पर रही। छात्रा का आरोप है कि जून में उत्पीड़न ज्यादा बढा। यह लगातार चलाता रहा तब मैन 7 जुलाई को कुलपति से मिल कर शिकायत की उसके बाद यह प्रकरण ग्रीवांस सेल के पास गया। 11 जुलाई को ग्रीवांस सेल की चेयरपर्सन प्रो रोयाना सिंह के सामने प्रोफेसर ने Sorry भी कहा। उसके बाद सेल की चेयरपर्सन ने मामले को रफा-दफा करने की बात कही। साथ ही कहा था कि भविष्य में कुछ गलत होता है तो बतना फिर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन उसके बाद 14 जुलाई से वह अपनी शोध छात्राओे से मेरे खिलाफ विभाग और सोशल मीडिया पर कैंपेनिंग कराने लगे। उनकी शोध छात्राओं ने मुझे फोन करके प्रोफेसर को बदनाम करने का आरोप लगाया गया। ये सारी जानकारी से मैं वूमेन ग्रीवास सेल की चेयरपर्सन प्रो रोयाना सिंह और कुलपति प्रो भटनागर को अवगत करा चुकी हूं। मैने ग्रीवांस सेल की चेयरपर्सन से इनके द्वारा कहे गए Sorry को लिखित रूप में मांगा है।

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इस मामले में पत्रिका ने कुलपित प्रो भटनागर से बात करने की कोशिश की लेकिन वह एक मीटिंग में व्यस्त थे। उन्होंने पत्रिका संवाददाता को मैसेज से जवाब दिया कि वह फिलहाल बात करने की स्थिति में नहीं हैं।

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वहीं आरोपी प्रोफेसर से भी पत्रिका संवाददाता ने तीन बार संपर्क करने की कोशिश की पर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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