
बीजेपी
डॉ. अजय कृष्ण चतुर्वेदी
वाराणसी. लोकसभा और विधानसभा में बड़ी सफलता अर्जित करने के बाद भारतीय जनता पार्टी की निगाह अब नगर निकाय चुनाव पर है। खास तौर पर प्रदेश के सभी 16 नगर निगम के मेयर पद को लेकर। हालांकि पार्टी हर नगर निगम सदन में बहुमत हासिल करने के लिए भी गुणा गणित बिठाने में जुटी है। पार्टी के भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि दिल्ली की तर्ज पर पार्टी उत्तर प्रदेश नगर निगम चुनाव में भी पुराने प्रत्याशियों को बदल सकती है। इस पर गंभीरता से मंथन चल रहा है। वहीं बनारस के मेयर पद पर कोई बाहरी (बनारस का मूल निवासी मगर लंबे समय से यहां रहता न हो) प्रत्याशी उतारने पर भी गंभीर है। ये ऐसा प्रत्याशी होगी जिसके नाम पर पार्टी के सारे अंतरविरोध दूर हो जाएंगे। यह बड़ा उद्यमी, शिक्षित व साफ सुथरी छवि वाला होगा। सूत्र बताते हैं कि मेयर पद के लिए अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की जोड़ी ही करेगी। प्रत्याशी ऐसा होगा जो जीएसटी और नोटबंदी के असर को भी नकार सके।
बता दें कि दिल्ली नगर निगम चुनाव से पहले वहां भी विपक्ष के पास बीजेपी बहुमत वाले निगम सदन को लेकर आक्रामक था। आमजन के बीच भी यह धारणा बनी थी कि इन्होंने पांच साल तक कुछ काम नहीं किया। ऐसे में लग रहा था कि दिल्ली नगर निगम चुनाव में बीजेपी को पराजय का सामना करना पड़ेगा। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने नई चाल चली और सारे पार्षद प्रत्याशियों को बदल कर बिल्कुल नए चेहरे मैदान में उतार दिए थे। इसके जरिए पार्टी ने साफ संदेश दिया कि पूर्व में भले बीजेपी की स्थानीय सरकार ने कोई काम न किया हो पर अब नई टीम के नए चेहरे लगातार सक्रिय रहेंगे। दिल्ली के विकास की आंधी चलेगी। ठीक वैसा ही फार्मूला बीजेपी नेतृत्व यूपी में भी अपनाने पर मंथन कर रहा है। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में एकाध बैठक भी हो चुकी है गुलाबबाग स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में। इसके पीछे कारण यह है कि बनारस में भी नगर निगम के पार्षदों और मेयर को लेकर आमजन के बीच गुस्सा है। इतना ही नहीं इस बीजेपी बहुमत वाले नगर निगम सदन की निष्क्रियता ही रही कि पीएम के राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान को उनके संसदीय क्षेत्र में ही पलीता लगा। पार्षद हों या मेयर केवल कोरम पूरा करने के लिए फोटो शेसन तक ही सीमित रहे। दूसरे नगर की किसी समस्या से उनका कभी कोई खास सरोकार नहीं रहा। ऐसे में मतदाता खीझें हैं जिन्हें फिर से अपने पाले में करने के लिए कर्मठ, क्षेत्र में सक्रिय और निगम प्रशासन पर दबाव बना कर इलाके में काम कराने वाले प्रत्याशियों की तलाश की जा रही है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस बार केवल पार्टी के पार्षद प्रत्याशी ही नहीं बदले जाएंगे बल्कि उनके रिश्तेदारों को भी प्रत्याशी नहीं बनाया जाएगा। यह संकेत स्थानीय पार्टी पदाधिकारियों को दे दिया गया है। कारण पार्षद पद के प्रत्याशियों का चयन जिलों के मंडल स्तरीय पदाधिकारी ही करेंगे। हर मंडल से तीन-चार नाम महानगर संगठन को सौंपा जाएगा जिसमें से एक या दो नाम काशी प्रांत को सौंपा जाएगा और काशी प्रांत के पदाधिकारी ही उसे अंतिम रूप दे देंगे। पार्षद पद के लिए प्रदेश कमेटी या प्रदेश अध्यक्ष का भी कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं होगा। प्रेदश पदाधिकारियों को कोई नाम सुझाना भी होगा तो वे मंडल से लेकर काशी प्रांत तक की कमेटी को सुझाएंगे।
पार्टी सूत्र बताते हैं कि मेयर पद के लिए तमाम पार्टी पदाधिकारी और पूर्व पदाधिकारी यहां तक कि पूर्व मेयर तक इस कोशिश में लगे हैं कि उनके नजदीकी रिश्तेदारों को प्रत्याशी बना दिया जाए। लेकिन पार्टी नेतृत्व इस पद के लिए भी बहुत फूंक-फूंक कर कदम उठाने वाली है। किसी भी स्तर पर विवादित छवि वाले पार्टी कार्यकर्ता या नेता के रिश्तेदारों को तो प्रत्याशी नहीं ही बनाया जाएगा। बल्कि एक भरोसेमंद सूत्र ने बताया कि पार्टी हाईकमान एक ऐसा मेयर प्रत्याशी उतारने में जुटा है जो मूल रूप से तो बनारस का ही होगा पर लंबे समय से वह यहां नहीं रह रहा है। साफ सुथरी छवि है। शिक्षित है। कोशिश है कि ऐसा प्रत्याशी आने के बाद अभी तक जो सवर्ण पार्टी और सरकार द्वारा मेयर पद के ओबीसी महिला होने को लेकर असंतुष्ट हैं उनकी नाराजगी भी जाती रहेगी। अंतिम फैसला वाराणसी के सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अध्यक्ष अमित शाह की जोड़ी ही करेगी। किसी हवाई नेता को मौका नहीं मिलने वाला। कारण मेयर पद को लेकर यह जोड़ी काफी संवेदनशील है। किसी भी सूरत में पिछले चार बार से इस पद पर काबिज भाजपा इस बार इसे गंवाने नहीं वाली। ऐसे में वह किसी कीमत पर विपक्ष को कोई मौका नहीं देने जा रही है। प्रत्याशी ऐसा होगा कि वह जनमानस को भी भा जाए। प्रत्य़ाशी उद्यमी या व्यापारी भी होगा जिसके जरिए पार्टी जीएसटी के नुकसान की भरपाई भी कर सके।
Published on:
19 Oct 2017 03:44 pm
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