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ओस की बूंदों से बनती है बनारसी मलइयो की मिठास

केवल तीन महीने ही चख सकते हैं इसका स्वाद, क्या जानते हैं आप

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Sarweshwari Mishra

Sep 25, 2016

Malaiyo

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वाराणसी. बाबा भोले की नगरी काशी अपने घाटों और बनारसी साड़ी के लिए विश्वप्रसिद्ध है। यहां की मिठाईयों की भी एक अलग पहचान है। अगर मिठाइयों की बात करें तो अब हर जगह ऐसी मिठाइयां मिलने लगी हैं। लेकिन सर्दियों के दिन लोगों के जुबान पर मिठास घोलने वाला मलइयो काशी की खास पहचान है। बनारसी मलइयो एक मात्र ऐसी मिठाई है जिस पर आज भी बनारस का एकाधिकार है। इस मिठाई की सबसे बड़ी विशेषता यह है की इसको बनाने में ओस की बूंदों का इस्तेमाल होता हैं।




आंखों की रोशनी बढ़ाता है मलइयो
दूध और ओस की बूंदों से तैयार होने की वजह से यह सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। साथ ही आंखों की रोशनी के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। ओस की बूंदों में प्राकृतिक मिनिरल पाए जाते हैं जो स्किन को काफी लाभ पहुंचाते हैं। त्वचा में पड़ने वाली झुर्रियों को रोकते हैं। केसर, बादाम शक्तिवर्धक होते हैं।

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मलइयो में केसर, पिस्ता, बादाम, इलायची जैसी गुणकारी चीजें भी मिलाई जाती हैं। आयुर्वेद के जानकार भी मानते हैं कि मलइयो पौष्टिक होने के साथ ही शारीरिक सुंदरता को भी बढ़ाता है। यह चेहरे के निखार को बनाए रखता है। यह खास मिठाई सिर्फ जाड़ों में ही बनारस की गलियों में मिलती है।




केवल तीन महीने ही मिलती है ‘मलइयो’
काशी की फेमस मलइयो ओस के इस्तेमाल से बनने के कारण केवल सर्दियों के तीन महीने ही मिलती है। जितनी ज्यादा ओस पड़ती है उतनी ही इसकी गुणवत्ता बढ़ती है। इसकी बिक्री सुबह से प्रारम्भ होती है और 12 बजते बजते सारा स्टॉक खत्म हो जाता है। उसके बाद मलइयो खाने के लिए अगले दिन का ही इंतज़ार करना पड़ता है। यह मिठाई गंगा के किनारे बसे मोहल्लों में ही बिकती है। बच्चे-बूढ़े, जवान यहां तक कि देशी विदेशी पर्यटक इसे चाव से खाते हैं। जो भी इसका एक बार स्वाद चखते हैं वे इसके दीवाने हो हो जाते हैं।


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कैसे बनती है ये मलइयो मिठाई
दूध से बनने वाली इस मिठाई को बनाने की शुरुआत सैकड़ों साल पहले बनारस से ही शुरू हुई थी। पहले कच्चे दूध को उबालकर खुले आसमान के नीचे ओस यानि कुहासे में रखा जाता है। फिर दूध को काफी मथने से निकले झाग में चीनी, केसर, पिस्ता, इलायची और मेवा मिलाया जाता है।



भले ही रसोई में अत्याधुनिक मशीनें आ गई हो लेकिन बनारसी मलइयो को तैयार करने में आज भी पारंपरिक सील-लोढे का ही इस्तेमाल होता है। दूध और ओस की बूंदों से तैयार होने की वजह से मलइयो सेहत और आंखों की रोशनी के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है।

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