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नहीं रही प्रख्यात समाजवादी और नाट्यकार डॉ शकुंतला शुक्ला

मस्तिष्काघात के बाद डॉक्टर शकुन्तला शुक्ला पिछले 10 दिनों से बीएचयू में भर्ती थी

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Shakuntala Shukla

डॉ. शकुंतला शुक्ला

वाराणसी. वरिष्ठ नाट्य निर्देशक, साहित्यकार व्योमेश शुक्ला की मां डॉ. शकुन्तला शुक्ला का बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में बुधवार को निधन हो गया। शकुन्तला शुक्ला पिछले 10 दिनों से मस्तिष्काघात के बाद बीएचयू में भर्ती थी। गुरूवार को बनारस के मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा।

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69 साल की डॉ. शकुन्तला शुक्ला देश भर में अपनी अनूठी नाट्य प्रस्तुतियों से धूम मचा रही नाट्य संस्था 'रूपवाणी' की संयोजिका और बनारसियत की पहचान थी। दिसंबर 1948 में जन्मी डॉ. शकुन्तला शुक्ला काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की छात्रा रही हैं। आधा दर्जन से ज्यादा विषयों में परास्नातक डॉ शुक्ला वरिष्ठ मज़दूर नेता और नेशनल हेराल्ड के एसोशियेट एडिटर स्वर्गीय पंडित सुधीन्द्र शुक्ल की पत्नी और सुप्रसिद्ध लेखक ,कवि और नाट्य निर्देशक व्योमेश शुक्ल की मां थी ।

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डॉ. शुक्ला ने अपनी युवावस्था में छात्र आंदोलनों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और स्वर्गीय राजनारायण के सम्पर्क में आने के बाद उत्तर प्रदेश में समाजवादी आन्दोलन की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की, छात्र जीवन और समाजवादी राजनीति में वो कई बार जेल भी गई थी । डॉ शकुन्तला शुक्ला ने बनारस शहर में विवेकानंद अभिनव शिक्षण संस्थान के नाम से सस्ती लेकिन उत्कृष्ट मुहैया कराने के लिए विद्यालयों की एक श्रृंखला शुरू की, जिसके छात्र आज देश-भर में अपनी पहचान बना रहे हैं ।

डॉ. शकुन्तला शुक्ला ने रूपवाणी की संयोजिका के तौर पर निराला की सुप्रसिद्ध कृति "राम की शक्ति पूजा" जयशंकर प्रसाद की 'कामायनी' और भास रचित 'पञ्चरात्रं' समेत आधा दर्जन नाटकों को तैयार कराया जिसका मंचन देश के कोने कोने में किया गया , उन्होंने 'न्यायदंश' नाम की एक फीचर फिल्म का भी निर्माण किया ।