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VijayaDashmi पर वाराणसी में जलाया जाएगा सबसे ऊंचा रावण का पुतला

Vijaya Dashmi पर होगी राम चरितमानस पर आधारित लीलाआकर्शक मूक लीला को देखने के लिए अभी लोग करने लगे हैं तैयारी

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रावण का पुतला

रावण का पुतला

वाराणसी. धर्म नगरी काशी में मंगलवार को विजयादशमी को असत्य पर सत्य की जीत का महापर्व मनाने की तैयारी शुरू हो गई है। हर किसी को इंतजार है तो उस गोधूलि बेला का जब भगवान भोले के भक्त महा पंडित रावण का पुतला जलाया जाएगा। इसके लिए तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इस बार बनारस में सबसे ऊंचा पुतला जलाया जाएगा।

बता दें कि विजयादशमी पर पिछले करीब चार दशक से डीजल रेल इंजन कारखान के सेंट्रल मैदान में गोस्वामी तुलसी दास कृत रामचरित मानस पर आधारित आकर्ष मूक लीला होती है। लीला के उपरांत यहीं रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। आकर्षक आतिशबाजी होगी। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। तीनों ही पुतले तैयार कर लिए गए हैं। पुतलों में पटाखे भी भरे गए हैं। यहां बता दें कि इस बार रावण का पुतला 70 फीट ऊंचा होगा जबकि ऊंचा होगा मेघनाद का पुतला 60 फीट और कुंभकरण पुतला 65 फीट ऊंचा होगा।

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इससे पहले डीरेका इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं की प्रस्तुति मूक रामलीला होगी। रामचरित मानस पर आधारित राम वन गमन से लेकर रावण वध तक की लीला को ढाई घंटे में रूपक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। इस रूपक में पात्र संवाद नहीं बोलते है। संवाद सिर्फ मंच से किया जाता है। लीला 60 प्रतिशत दृश्य और 40 प्रतिशत श्रब्य होती है। संवाद मंच से बोले जाते हैं और पात्र मूक अभिनय करते हैं। इसमें रामचरित मानस की चौपाइयों, गीत, कजरी और हिंदी की सभी विधाओं का प्रयोग किया जाता है। इस लीला को देखने के लिए बनारस ही नहीं पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से लोग आते हैं। यह लीला भी अब काशी के लक्खी मेलों में शुमार हो चला है।

विजया दशमी समिति डीरेका के निदेशक एसडी सिंह ने बताया कि शाम तीन बजे से लीला शुरू होगी और गोधूलि बेला में रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन होगा।