
पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क
वाराणसी. पीएम के संसदीय क्षेत्र में चोरी के वाहनों की इन दिनों बाढ़ सी आ गई है। बड़ी से बड़ी और महंगी से महंगी गाड़ी आपको 50 हज़ार से लेकर 5 लाख तक में मिल जाएगी। इसके लिए बस रु लेकर आरटीओ कार्यालय आइए। जी हाँ। चोरी की गाड़ियों की खरीद बिक्री के लिए आरटीओ कार्यालय ही बेस्ट प्लेस है। क्योंकि यहीं के अधिकारी और कर्मचारियों की मिली भगत से पूरा रैकेट चलाया जा रहा था। ये ऐसा फर्जी दस्तावेज तैयार करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिसने पूरे सिस्टम से ही विश्वास को हिला कर रख दिया।
दूसरे राज्यों की गाड़ियों का हब बना बनारस
चोरी की गाड़ियों को खरीदने, बेचने और उसके पेपर तैयार करने में सबसे बड़ा हाथ आरटीओ का होने से यहाँ कई अन्य राज्यों से भी ग्राहकों को लाया जाता था। साथ ही दूसरे राज्यों में चोरी हुई गाड़ियों को भी यहाँ लाकर पेपर तैयार करके बाहर भेजने का काम होता था।
पुलिस को मौके पर मिली गाड़ियों में 8 स्विफ्ट डिजायर, 1 स्कार्पियो बरामद हुए हैं। जबकि पूछताछ में सैकड़ों कार होने की उम्मीद जताई जा रही है।
अब इस रैकेट में शामिल 3 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। इस गैंग का सरगना मध्यप्रदेश के रायसेन का निवासी जो कि पुलिस की गिरफ्त में आने से पहले ही फरार हो गया है।
मध्यप्रदेश से वाहनों को चुराकर बिहार में सेल होती थी। जबकि बिहार से चोरी हुई गाड़ियों को मध्यप्रदेश में बेचा जाता था। वाराणसी के ARTO कार्यालय में कुछ कर्मचारियों की मदद से ये सारे फर्जी पेपर बनाते थे।
वाराणसी ARTO कार्यालय में कार्यरत प्राईवेट डाटा ऑपरेटर मिथिलेश फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। तीनो आरोपी वाराणसी के ही रहने वाले हैं। जबकि इनका सरगना मध्य प्रदेश का है।
वहीं बिहार से जुड़ा होने से मामला आर बड़ा दिखाई दे रहा है। वाराणसी की सदर कोतवाली, सर्विलांस टीम और स्वाट टीम ने कटसिला गावँ के पास मुखबिर की सूचना पर अचानक से रेड मारी थी।
IPS को आई एक कॉल ने बंद कराई फर्जी पेपर्स की दुकान
पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल को मध्य प्रदेश पुलिस से कुछ इनपुट मिले थे जिसमें मध्य प्रदेश से चुराई गई वाहनों को वाराणसी चंदौली होते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार कर बिहार में बेचा जाता है । मिली इनपुट के आधार पर एसपी अंकुर अग्रवाल ने स्वाट टीम, सर्विलांस टीम और सदर कोतवाली पुलिस को मामले के खुलासे के लिए लगाया। लगातार काम कर रही टीम को इस दौरान मुखबिर से सूचना मिली की गैंग के तीन सदस्य कटसीला गांव के पास रिलायंस पेट्रोल पंप के समीप नेशनल हाईवे 2 पर खड़े हैं और पुराने वाहनों को बिहार बेचने की फिराक में है। इस क्रम में टीम ने घेराबंदी की और तीन आरोपियों मिथिलेश कुमार शिवाजी और पालचंद नियोगी को गिरफ्तार कर लिया । तीनों आरोपियों को सदर कोतवाली लाकर पूछताछ की गई तो इसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आये। पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल ने बताया की मिथिलेश कुमार वाराणसी में परिवहन कार्यालय में प्राइवेट डाटा ऑपरेटर के पद पर कार्यरत है। गैंग का सरगना कमल सिंह और धीरज चौबे मध्य प्रदेश से वाहनों को चुरा कर लाते थे । वाराणसी परिवहन कार्यालय में दस्तावेज तैयार होता था और फिर वाहनों को बिहार में जाकर भेज दिया जाता था । परिवहन विभाग की वेबसाइट में कुछ खामियां हैं । जिसका फायदा मिथिलेश कुमार उठाता था और इन चोरी की गाड़ियों के ऐसे दस्तावेज बनाकर देता था जिससे की इन दस्तावेजों को गलत साबित न कर पाए और इन्हीं दस्तावेज के आधार पर इन गाड़ियों को सेकंड हैंड कार शोरूम,ओलेक्स केबसाथ ही अन्य लोगों को बेच दिया जाता था। मामले में गंगा का सरगना कमल सिंह जो कि बनखेड़ी उदयपुरा जिला रायसेन मध्य प्रदेश का निवासी है और धीरज चौबे जो कि हाजीपुर थाना चोलापुर वाराणसी का निवासी है फरार हैं। जबकि चौकाघाट जैतपुरा वाराणसी निवासी मिथिलेश कुमार, पहड़िया नक्खीघाट सारनाथ वाराणसी पालचंद नियोगी को पुलिस ने गिरफ्तार कर विधिक कार्रवाई कंप्लीट कर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल ने बताया कि 3 वर्षों से यह गैंग काम कर रहा है । जिसमें पूछताछ में मिथिलेश ने पुलिस को बताया कि मेरे साथी कमल जो मध्यप्रदेश में वाहनों की चोरी करता है मैं और धीरज वाहणो को भोपाल मध्य प्रदेश से वाराणसी लाते हैं । फिर फर्जी वाहन स्वामी का नाम पता आधार कार्ड मेरा साथी शिवाजी सिंह जी द्वारा बनाया जाता है । पाल
Updated on:
05 Nov 2021 04:09 pm
Published on:
05 Nov 2021 03:16 pm
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