
CM Yogi Adityanath
वाराणसी. सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार ने पांच साल पूरा कर लिया है। यूपी की सत्ता जब सीएम योगी को सौंपी गयी थी तब माना गया था कि आरएसएस ने पीएम नरेन्द्र मोदी के उत्तराधिकारी के रुप में सीएम योगी का चयन किया है। यूपी सरकार ने साल भर का कार्यकाल पूरा कर लिया है। साल भर के कार्यकाल में पांच ऐसे सवाल है जो सीएम योगी सरकार पर बड़ा सवाल उठा रहे हैं।
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गोरखपुर व फूलपुर चुनाव की हार
बीजेपी ने निकाय चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया था तो उसकी क्रडिट सीएम योगी सरकार को मिली थी लेकिन गोरखपुर व फूलपुर चुनाव में जिस तरह से सीएम योगी व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के प्रत्याशी चुनाव हारे हैं उससे सवाल उठने लगा है कि पीएम मोदी के प्रचार के सहारे मिली यूपी की सत्ता को सीएम योगी संभाल नहीं पा रहे हैं।
अपना दल व सुभासपा को मनाने के लिए अमित शाह का आना पड़ा
यूपी चुनाव में बीजेपी की जीत में ओमप्रकाश राजभर की पार्टी अपना दल व अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल का भी योगदान है लेकिन साल भर के अंदर ही सीएम योगी सरकार से दोनों सहयोगी दल की बन नहीं पायी है। सीएम योगी भी इन दलों को मनाने में असफल रहे। गठबंधन बचाने के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को आगे आने पड़ा है।
अखाड़ा परिषद् के संत हुए नाराज, कुंभ में शाही स्नान से किया मना
इलाहाबाद में वर्ष 2019 में लगने वाले महाकुंभ के लिए सीएम योगी सरकार ने अभी से तैयारी की है इसी बीच अखाड़ा परिषद् के संत भी सीएम योगी से नाराज हो गये हैं। खास बात है कि सीएम योगी खुद ही गोरक्षपीठ के महंत है इसके बाद भी संतों को नहीं मना पाये हैं और फिर से अमित शाह को आगे आना पड़ा है।
अखिलेश यादव की तरह लगा जातिवाद करने का आरोप,ब्राह्मण वर्ग भी नाराज
बीजेपी ने यूपी चुनाव के समय अखिलेश यादव पर जातिवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया था और अब यही आरोप सीएम योगी पर लग रहा है। राजीव रौतेला हो या फिर यूपी के डीजीपी। इसको लेकर सीएम योगी सरकार पर सवाल उठने लगे हैं। ब्राह्मण वर्ग भी सीएम योगी से नाराज है उनका आरोप है कि सीएम योगी सिर्फ एक ही जाति के लोगों को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।
सीएम योगी की सभा में नहीं हो रही भीड़, खाली रहती कुर्सियां
पूर्वांचल में सीएम योगी की सभा की बात की जाये तो भीड़ नहीं होती है। हजारों कुर्सियां खाली रह जाती है। बिना संसाधन के ही इससे अधिक भीड़ ओमप्रकाश राजभर की सभा में होती है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में युवा उद्घोष कार्यक्रम हो या फिर कटिंग का कार्यक्रम। इन सभी जगहों पर मुख्यमंत्री पद के अनुसार लोगों की भीड़ नहीं हुई थी।
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लोकसभा चुनाव में मिली हार तो सीएम योगी का सफर होगा कठिन
बीजेपी के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण चुनाव लोकसभा 2019 है। दिल्ली की सत्ता में फिर से कब्जा करने के लिए बीजेपी को वर्ष 2014 का जादू दोहरना होगा। यूपी में सीएम योगी सरकार है इसलिए बीजेपी की सीटे बहुत कम होती है तो सीएम योगी आदित्यनाथ के लिए आगे का सफर कठिन हो जायेगा।
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Published on:
29 Mar 2018, 2:09 PM IST
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