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वाराणसी: शिक्षा के क्षेत्र में काशी को एक नया उपहार मिलने जा रहा है। यहां उत्तर प्रदेश की पहली नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की स्थापना की जा रही है। बताया जा रहा है कि यह यूनिवर्सिटी प्रदेश की पहली और देश की दूसरी फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी होगी, जिसका निर्माण राजातालाब क्षेत्र के शहंशाहपुर में किया जाएगा। बताया जा रहा की यहां का पहला सत्र इसी वर्ष से शुरू किया जा रहा है।
शहंशाहपुर में लगभग 50 एकड़ भूमि पर उत्तर प्रदेश की पहली नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की स्थापना की जाएगी। यूनिवर्सिटी की स्थापना के बाद अपराध की जांच प्रक्रिया सटीक और तेज होने का अनुमान है। इससे पुलिस और जांच एजेंसी को अपराधों की तह तक पहुंचने में काफी मदद मिलेगी। इसके साथ ही इस यूनिवर्सिटी के शुरू होने के बाद युवाओं को अपने करियर को ऊंचाई तक पहुंचाने के नए अवसर भी मिलेंगे।
वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि इस यूनिवर्सिटी में फॉरेंसिक साइंस, साइबर सिक्योरिटी, क्रिमिनोलॉजी तथा अन्य आधुनिक विषयों में पठन-पाठन कराया जाएगा। छात्र इन विषयों में दाखिला लेकर इसकी विशेषज्ञ हासिल करेंगे और उन्हें रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। उन्होंने बताया कि इस परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और 2026-27 से इसका पहला बैच शुरू कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि फॉरेंसिक सुविधाओं की कमी के कारण अपराध से जुड़े मामलों में जांच रिपोर्ट आने में देरी होती है। इससे पुलिस कर्मियों को भी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इस यूनिवर्सिटी के बन जाने से यह प्रक्रिया तेज हो जाएगी और अपराधियों तक पहुंचने में पुलिस को काफी मदद भी मिलेगी। उन्होंने बताया कि इसका लाभ सिर्फ वाराणसी ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों को भी मिलेगा।
जिलाधिकारी ने बताया कि यूनिवर्सिटी का स्थाई कैंपस बनने से पहले ही इसका एक अस्थाई कैंपस जाल्हूपुर में स्थापित किया जाएगा और इसी सत्र से इसमें पठन-पाठन का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह यूनिवर्सिटी राष्ट्रीय स्तर की होगी, जहां से प्रशिक्षित छात्र ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी की डिग्री भी हासिल कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि इन डिग्रियों को लेने के बाद विशेषज्ञ विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए अपराध की जांच को और अधिक प्रभावी बनाएंगे। उन्होंने बताया कि इससे ना केवल कानून व्यवस्था मजबूत होगी बल्कि न्यायिक प्रक्रिया भी तेज हो जाएगी।
जिलाधिकारी ने बताया कि 50 एकड़ भूमि पर बनने वाली इस यूनिवर्सिटी का कैंपस इंटीग्रेटेड होगा। इस यूनिवर्सिटी में फॉरेंसिक साइंस लैबोरेट्री और हॉस्टल की भी सुविधा होगी। इसके साथ ही अलग-अलग विषयों में कोर्स उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने बताया कि इस यूनिवर्सिटी से पास आउट बच्चे न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि देश के अलग-अलग लैब में अपनी सेवाएं देंगे और उनके अनुभव फॉरेंसिक के क्षेत्र में काम आएंगे।
Published on:
09 Apr 2026 09:12 am
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