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संकटमोचन संगीत समारोहः संगीत संग पेंटिंग, चित्रकारी और मूर्ति कला का फ्यूजन

तूलिका का कमाल, विभूतियों के दुर्लभ चित्रो को उतारा गया कैनवास पर, मिट्टी से उकेरे गये काशी के पंचरत्न।  

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Sankat mochan Temple

Sankat mochan Temple

वाराणसी. संकट मोचन संगीत समारोह में अब केलव सुर, लय, ताल का ही लुत्फ नहीं बल्कि हनुमत दरबार में अब संगीत के साथ पेंटिंग, चित्रकारी और मूर्ति कला का फ्यूजन भी देखने को मिलने लगा है। इधर जितने श्रोता और दर्शक नृत्य व संगीत का मजा उठा रहे हैं तो उधर कला दीर्घा में युवाओं की खासी रुचि दिख रही है। एक से एक चित्रकारी, पेंटिंग और अब तो मूर्तिकला भी लोगों को लुभाने लगी है।

संगीत समारोह के चौथी निशा में कला दीर्घा में एक कोना और गुलजार हो गया जब सनातन धर्म के पांच अंक के महत्त्व को समझकर काशी के पांच भारतरत्नों की आकृति मिट्टी से उकेरी गई। एक ही मूर्ति में काशी को समाहित करते हुए मूर्तिकार ने कल्पनातीत प्रस्तुति पेश कर मूर्तिकला का लोहा मनवाया। उधर भारतीय गणराज्य के तूलिका प्रहरी कोने में लगभग देश के सभी दिवंगत महान कलाकरों को एक ही कैनवास पर उतार दिया गया है। आप की तूलिका कोना भी संगीत समारोह में आने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी है तो साथ ही नन्हे-मुन्ने कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का सुनहरा मौका मिल रहा है।

मूर्तिकार राजेश कुमार ने मिट्टी से प्रख्यात दार्शनिक भगवान दास, उनके नीचे चिंतन मुद्रा में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, प्रख्यात संगीतज्ञ रविशंकर, ख्यात शहनाई वादक विस्मिल्लाह खा के साथ बीएचयू के संस्थापक महामना मदनमोहन मालवीय जी को बखूबी जीवंत किया है। इस मूर्ति में पीछे की ओर समूचा काशी प्रतिबिंबित हो रहा है। मूर्ति के पार्श्व भाग में काशी के घाट, गंगा, नंदी और मंदिर के साथ बोधिवृक्ष देखा जा सकता है।

भारतीय गणराज्य के तूलिका प्रहरी नामक शीर्षक से देश के महान कलाकारों को एक ही कैनवास पर उतारने की अनूठी पहल हो रही है। यह काम काशी के नवोदित कलाकार यहां के ख्यात कलाकार प्रो. सुनील विश्वकर्मा के निर्देश में कर रहे है। इसे बनाने में सुनील कुशवाहा, बच्चा बाबू, पंकज, वेदप्रकाश मिश्र, बलदाऊ, पूजा शाहू सहित दर्जनों कलाकार लगे है। बताते चले कि विगत वर्ष इन कलाकारों ने एक ही कैनवास में काशी के सौ महान विभूतियों को बनाया था जिसकी देश-विदेश में खूब सराहना हुई।

तीसरी कड़ी में 'आपकी तूलिका' को नन्हे-हाथों ने थामा है। अभिभावक स्वरलहरियों में गोते लगा रहे है तो नन्हे बच्चे धुन के साथ तूलिका पर अपनी चित्रकारी कर भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर है। कोई राम नाम लिख रहा तो हनुमान जी की आकृति उकेर रहा है। पिछले दो दिनों में दो कैनवास नन्हे कलाकारों ने भर दिए है।