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वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद पर फिलहाल नहीं चलेगा बुलडोजर, रेलवे ने हटाया नोटिस, मस्जिद कमेटी में खुशी

Ganj Shahida Mosque Near Kashi Railway Station: वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन के पास स्थित गंज शहिदा मस्जिद को खाली करने की नोटिस को रेलवे प्रशासन ने रद्द कर दिया है। अब यह मस्जिद नहीं गिराई जाएगी।
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वाराणसी

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Vijendra Mishra

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Updated: 24 Jun 2026, 1:28 PM IST

Railway pasted notice at Ganj Shahida Mosque

काशी की गंज शहिदा मस्जिद (फोटो- पत्रिका)

Ganj shahida mosque dispute : वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन के समीप स्थित गंज शहिदा मस्जिद को लेकर नया विवाद सामने आया है। यहां रेल प्रशासन ने मस्जिद को 20 जून तक खाली करने को लेकर नोटिस जारी किया था। इसके बाद उसे आदेश को रद्द करने वाला नोटिस मंगलवार को मस्जिद पर चस्पा किया गया। वहीं कुछ देर बाद वापस नोटिस को हटा लिया गया और स्थिति यथावत की बताई गई। हालांकि, इस मामले में अभी तक रेल प्रशासन ने अपना पक्ष नहीं रखा है।

जानकारी के मुताबिक, काशी रेलवे स्टेशन को मॉडल रेलवे स्टेशन के रूप में विकसित किए जाने को लेकर पास में ही स्थित गंज शहिदा मस्जिद को खाली करने के लिए रेल प्रशासन ने 13 जून को नोटिस जारी किया था और मस्जिद को 20 जून तक खाली करने को कहा था। वहीं, मंगलवार की शाम एक नोटिस चस्पा किया गया जिसमें पुराने आदेश को रद्द करने की बात लिखी थी। इस बात की जानकारी होने के बाद मस्जिद कमेटी ने खुशी जताई और राहत की सांस ली, लेकिन कुछ देर बाद ही पूरा मामला उलटा पड़ गया।

हटाया गया रद्द करने वाला नोटिस

वहीं, मंगलवार की देर शाम रेलवे के अधिकारी मौके पर पहुंचे और चस्पा किए गए नोटिस को वहां से हटा दिया। नोटिस हटाने वाले फिटर सुनील कुमार ने बताया कि उन्हें आदेश रद्द करने वाला नोटिस लगाने के लिए उच्च अधिकारियों ने कहा था, लेकिन बाद में अधिकारियों के कहने पर दोबारा से नोटिस को हटाया गया है। हालांकि, नोटिस हटाने के दौरान रेल कर्मियों को स्थानीय लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ा। वहीं अभी तक इस मामले में रेल प्रशासन ने कोई स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है।

मस्जिद के एक हजार साल पुरानी होने का दावा

वहीं, इस मामले के बाद मसाजिद कमेटी के जॉइंट सेक्रेटरी एसएम यासीन ने बताया कि मस्जिद का अस्तित्व 1000 साल पुराना है और इसका निर्माण 1034 ईस्वी में हुआ था। उस समय काशी रेलवे स्टेशन का अस्तित्व नहीं था। ऐसे में रेल प्रशासन द्वारा मस्जिद की जमीन को अपना बताया जाना कहीं से भी तर्कसंगत नहीं है। गौरतलब है कि रेल प्रशासन द्वारा 20 जून तक मस्जिद को खाली करने का समय दिया गया था, जिससे अंदेशा जताया जा रहा है कि कभी भी इस पर ध्वस्तिकरण की कार्रवाई की जा सकती है।

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