
जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वाल्टर स्टेनमायर वाराणसी के गंगा आरती को अपलक निहारते रहे। वाल्टर के लिए यह अद्धुत नजारा था। ऐसी अलौकिकता की कल्पना भी शायद उन्होंने नहीं की होगी जो उन्हें काशी की शाम देखने को मिला ।

जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वाल्टर स्टेनमायर इन दिनों भारत दौरे पर हैं और गुरुवार को एक दिन के दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे थे ।

जर्मन राष्ट्रपति दशाश्वमेध घाट पहुंचे तो घाट की अप्रतिम सुंदरता देख अवाक रह गए। पूरा घाट गेंदा, गुलाब के फूल-माला से सजा मह-मह कर रहा था। घाट के प्रस्तर सोपानों पर टिमटिमाते दीपकों की छटा अतुलनीय थी। मानों स्वर्ग धरती पर उतर आया हो।

घाट पर जैसे ही राष्ट्रपति वाल्टर पहुंचे वैदिक ब्राह्मणों ने पहले गंगा पूजन कराया। उसके बाद वह उसी मणि पर बैठें जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो साल पहले जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे के साथ बैठ कर गंगा आरती का मनोरम दृश्य देखा था। फिर शुरू हुई गंगा आरती। गंगा सेवा निधि ने इस मौके को यादगार बनाने के लिए खास इंतजाम किए थे।

आम दिनों में जहां पांच से सात वैदिक ब्राह्मण आरती करते हैं वहीं आज के खास दिन नौ वैदिक ब्राह्मण द्वारा मां गंगा की महाआरती की गई। इन विप्रों के पीछे रिद्धि-सिद्धि के रूप में 18 कन्याएं मौजूद रहीं। पूरा नजारा छोटी देव दीपावली जैसा प्रतित हो रहा था।