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गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में फिर 72 घंटों में 61 और बच्चों की मौतें

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज मेंं एक बार फिर 72 घंटों में 61 और बच्चोंं की मौत हुई है, मौतों की वजह इंसेफेलाइटिस समेत अन्य रोग बताए गए हैं।

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Goprakhpur Hospital Tregedy Death again

गोरखपुर में फिर हुई बच्चों की मौत (प्रतीकात्मक)

गोरखपुर. बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। बीते 72 घंटों में 61 और बच्चे काल की गाल में समा गए। इसमें इन्सेफेलाइटिस से तो 11 बच्चे जबकि नियोनेटल वार्ड में 25 व दूसरी वजहों से 25 बच्चों की मौत हो गई।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले 24 घंटों में इन्सेफेलाइटिस से चार मासूमों की मौत हुई है, जबकि रविवार व सोमवार को इंसेफेलाइटिस से मरने वाले बच्च्चों की मौत की संख्या सात रही। इसके अलावा पिछले तीन दिनों में मेडिकल कॉलेज के नियोनेटल वार्ड में 25 बच्चों की मौत हो चुकी है। रविवार व सोमवार को 15 बच्चों की मौत इस वार्ड में हुई जबकि 10 बच्चों की मौत 24 घंटों के भीतर हुई। अन्य बीमारियों से तीन दिनों में 25 बच्चे काल के गाल में चले गए। इसमें रविवार व सोमवार को 14 और मंगलवार को 11 बच्चों की मौत हुई है।

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आज ही गिरफ्तार हुए बीआरडी प्रिंसिपल व उनकी पत्नी

पिछले दिनों गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुई बच्चों की मौत के मामले में प्रिंसिपल राजीव मिश्रा और उनकी पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला को मंगलवार को ही कानपुर से गिरफ्तार किया गया। बच्चों की मौत वाले हादसे के दिन ऑक्सीजन सिलिण्डर की व्यवस्था कर मीडिया में हीरो बने डॉ. कफील खान की गिरफ्तारी के लिये पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। उनके घर पर भी पुलिस ने छापेमारी की। बता दें कि गोरखपुर बच्चों की मौत मामले में प्रमुख सचिव की रिपोर्ट के बाद प्रिंसिपल राजीव मिश्रा के अलावा उनकी पत्नी व डॉ. कफील समेत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

इनके खिलाफ दर्ज है एफआईआर

गिरफ्तारी को लेकर गोरखपुर एसएसपी ने क्या कहा सुनिये...

इन जिलों के लिए कहर है इंसेफेलाइटिस

यह बीमारी पूर्वांचल के जिलों के लिए एक त्रासदी बन चुकी है। गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, महाराजगंज, कुशीनगर, सिद्घार्थनगर, संत कबीरनगर, बहराइच, लखीमपुर खीरी और गोंडा में हर साल इस बीमारी के कारण सैकड़ों बच्चों की मौत हो जाती है। इस बीमारी का कहर बिहार के भी बड़े हिस्से पर है।

अब तो ऑफ सीजन में भी जानलेवा हो चुकी यह बीमारी

इंसेफेलाइटिस का कहर बरसात के साथ शुरू होता है। लेकिन इस साल 2017 में जनवरी से ही इसका कहर जारी है। अकेले बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 60 से ज्यादा मासूम ऑफ सीजन में काल के गाल में समा गए। आंकड़ों पर अगर गौर करें तो इस साल जनवरी से लेकर जून तक बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के करीब 190 इन्सेफेलाइटिस मरीज भर्ती हुए। इनमें से 60 काल के गाल में समा गए।

38 जिलों में टीकाकरण भी हुआ, सब बेअसर

हर साल सैकड़ों बच्चों की जान लेने वाले इंसेफेलाइटिस की प्रभावी रोकथाम के लिये पूर्वी इलाकों के 38 जिलों में 25 मई 2017 से एक टीकाकरण अभियान चलाया गया। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने उस वक्त बताया था कि जापानी इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिये वर्ष 2006 से टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था लेकिन यह पाया गया है कि करीब 40 प्रतिशत बच्चे नौ से 12 माह पर तथा 16 से 24 माह की आयु पर दी जाने वाली खुराक से वंचित रह जाते हैं। बता दें कि मुहिम के तहत 88 लाख 57 हजार 125 बच्चों को टीके लगाये जाने का लक्ष्य था। इसके लिए एक करोड़ वैक्सीन भी मंगाया गया था।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इंसेफेलाइटिस के मरीजों की स्थिति वर्षवार










वर्ष भर्ती मरीजों की संख्यामौत


































20061940 413
20072423 516
20082194 558
20092663525
20103302514
20113308627


































20122517527
20132110619
20142208616
20151760445
20161924501

2017


(28 अगस्त तक)


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by DHIRENDRA GOPAL