
ज्ञानवापी परिसर में 7 फरवरी की रात को शब-ए-मेराज की महफिल सजी। इस दौरान मौलाना, मौलवी समेत करीब 1800 से ज्यादा मुस्लिम समुदाय के लोग मौजूद रहे। इस दौरान ज्ञानवापी परिसर में कुरान पढ़ी गई और नमाज अदा की गई।
परिसर में बातचीत के दौरान ज्ञानवापी सर्वे, तहखाना और कोर्ट के मामलों पर भी बात हुई। तकरीर पढ़ने वाले उलमा-ए-किराम ने पुराने किवदंतियों(इतिहास की घटनाओं) से ज्ञानवापी मस्जिद को जोड़ा। जलसे के दौरान डीसीपी से लेकर सिपाही तक बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। इस दौरान डीएम-सीपी समेत कई अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।
इस साल तीन गुना ज्यादा लोग हुए शरीक
ज्ञानवापी मस्जिद में शब-ए-मेराज पर पहली बार मुस्लिम समुदाय ने बढ़ चढ़कर भागीदारी की। हर साल की तुलना में इस साल लगभग तीन गुना ज्यादा लोग ज्ञानवापी पहुंचे। इस दौरान ना सिर्फ युवा बल्कि बजुर्ग भी ज्ञानवापी में जाते हुए दिखे।
मोहम्मद साहब की दी नसीहत
ज्ञानवापी में उलमा-ए-किराम ने कहा कि यह वही मुबारक रात है जब पैगम्बरे इस्लाम सात आसमानों के पार अर्श-ए-आजम से आगे मक्का में अल्लाह से मिलने के लिए चढ़े थे और उन्हें उपहार के रूप में पांच वक्त की नमाज मिली थी। मुस्लिम धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति आज रात अल्लाह की इबादत करता है और कुरान की तिलावत करता है, उसे कई रातों की इबादत के बराबर सवाब मिलता है। इस रात पैगम्बर पर विशेष प्रार्थना और दुरूद पढ़ा जाता है।
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शब-ए-मेराज उत्साह का त्योहार
मुसलमानों के त्यौहार शब-ए-मेराज भी मुस्लिम लोगों का एक रोमांचक त्यौहार है। इस दिन को धार्मिक लोग पैगंबर मोहम्मद के जीवन का प्रमुख हिस्सा मानते हैं। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक रजब महीने की 27वीं तारीख को मनाई जाने वाली शब-ए-मेराज की रात बेहद पवित्र मानी जाती है।
ऐसा माना जाता है कि इस दिन पैगंबर मोहम्मद ने इसरा और मेराज की यात्रा के दौरान अल्लाह की उपस्थिति देखी थी। इस यात्रा के पहले भाग को इसरा और दूसरे भाग को मेराज कहा जाता है।
Published on:
08 Feb 2024 09:48 am
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