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वाराणसी

काशी की धरोहर को बचाने के लिए काशीवाशियों का यूनेस्को तक संघर्ष का ऐलान

धरोहर बचाने को विश्वनाथ मंदिर के अलावा महामृत्युंज के महंत परिवार संग मानस मंदिर के अर्चक भी आए साथ।

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वाराणसी. काशी की धरोहर को बचाने के लिए काशीवासी अब धीरे-धीरे एकजुट होने लगे हैं। यहां तक कि दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर जुटान होने लगा है। रैलियों का दौर शुरू हो गया है। साथ ही हर दूसरे-तीसरे बैठक कर नई रणनीति भी तैयार की जाने लगी हैं। यहां तक कि अपनी मांग वाराणसी के सांसद और प्रधानमंत्री तक पहुंचाने के लिए मेमोरेंडम तक तैयार हो गया है। काशीवासियों ने कसम खाई है कि चाहे उन्हें जान देना पड़े लेकिन वो किसी सूरत में पुरखों की निशानी और काशी की धरोहर को नष्ट नहीं होने देंगे। आलम यह है कि अब इस संघर्ष में धर्मगुरु भी शरीक होने लगे हैं। पिछले दो दिन में ही श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत परिवार के साथ महामृत्युंजय मंदिर के महंत परिवार, मानस मंदिर के अर्चकों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सेदारी की। लोगों ने फैसला किया है कि यह मसला देश में नहीं सुलझा तो इसे यूनेस्को तक ले जाएंगे।

धरोहर बचाने के लिए संघर्ष समिति की बैठक

यूनेस्को में करेंगे रिपोर्ट

युगों-युगों से चली आ रही प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए काशी के सामाजिक सरोकार से जुड़े विभिन्न राजनीति दलों के नेतृत्व कर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता ‘बना रहे बनारस’ के संकल्प के साथ काशी की सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए तकरीबन लामबंद हो चुके हैं। इस संबंध में पिछले दिनों चित्रा सिनेमा हॉल चौक पर विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने दुनिया की सबसे प्राचीन सांस्कृतिक विरासत काशी की विरासत को बचाने के लिए दलीय सीमाओं को तोड़कर एक मंच पर आकर ‘बना रहे बनारस’ के संकल्प के साथ काशी की सांस्कृतिक विरासत एवं धरोहर को बचाने के लिये संकल्प लिया । बैठक मे एक स्वर से काशी विश्वनाथ मंदिर से गंगा घाट तक समतलीकरण के खिलाफ आर पार की लड़ाई का हुआ ऐलान किया गया। तय हुआ कि सड़क, सदन एवं कोर्ट तीनों स्तर पर लड़ाई लड़ी जाएगी। किसी भी सूरत में काशी की प्रचीन सांस्कृतिक विरासत को उजड़ने नहीं देंगें काशी के लोग। जरूरत पड़ी तो प्राचीन धरोहर को बचाने के लिए विश्व के फोरम अंतर्राष्ट्रीय अदालत यूनेस्को में भी अपील करेंगें क्योंकि 1995 में सरकार के तरफ से वाराणसी और मथुरा के जिलाधिकारी हाईकोर्ट मे शपथ पत्र दिये हैं कि काशी मथुरा की किसी भी प्राचीन विरासत को नुकसान नहीं होने देंगें।

 

बैठक में ये थे शामिल
बैठक में प्रमुख रूप से राजेन्द्र तिवारी सदस्य काशी विश्वनाथ महन्थ परिवार, विनय शंकर राय “मुन्ना ” महासचिव प्रबोधिनी फाउंडेशन, संजीव सिंह आम आदमी पार्टी , अजीत सिंह सभासद राजमन्दिर, सुनील यादव सभासद, साझा संस्कृति मंच की जागृति राही , वल्लभाचार्य पांडेय, आनंद प्रकाश तिवारी, अनूप श्रमिक, अरविंद सिंह, स्वामी सहजानंद विचार मंच के कन्हैया मिश्रा, एनएसयूआई के आकाश सिंह, ज्वाइंट एक्शन कमेटी के रामायण पटेल आदि शामिल शामिल रहे।

धरोहर बचाने को शांति मार्च

निकाला शांति मार्च

 

इस बैठक के बाद क्षेत्रीय नागरिकिों ने घंटा, घड़ियाल, डमरू के साथ मुंह पर काली पट्टी बाधे सड़क पर उतर आए। उन्होंने नीलकंठ महादेव से सरस्वती फाटक तक शांति मार्च निकाल कर गंगा पाथवे का विरोध दर्ज कराया। मार्च के दौरान काशी वासी तख्तियों पर विभिन्न नारे लिख कर चल रहे थे, मसलन ‘जिंदगी से दूर होंगे, विश्वनाथ से नहीं’, ‘जान देंगे घर नहीं’, आदि। शांति मार्च नीलकंठ महादेव से निकला तो कचौड़ी गली, चौक, ज्ञानवापी, बांसफाटक, गोदौलिया, चितरंजन पार्क होते सरस्वती फाटक तक गया। इस मौके पर नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में बैठक भी हुई जिसमें बीएचयू के सेवानिवृत्त प्रोफेसर सुधांशु शेखर, मानस मंदिर के मुख्य अर्चक पंडित बटुक नाथ शार्त्री, वरिष्ठ पत्रकार पद्मपति शर्मा आदि ने अपने विचार रखे। महामृत्युंजय महादेव महंत परिवार के सदस्य किशन दीक्षित ने गंगा पाथवे को काशी के वजूद को नष्ट करने की साजिश करार दिया।

धरोहर बचाने को शांति मार्च

तैयार किया संकल्प पत्र

इस मौके पर एक संकल्प पत्र तैयार किया गया। इस पर सभी ने हस्ताक्षर किए। यह मांग पत्र काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को सौंपा जाएगा। इसके अलावा वाराणसी के सांसद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ , धर्मार्थ कार्य विभाग के सचिव व कमिश्नर व जिलाधिकार के साथ नगर के सभी जनप्रतिनिधियों को भेजने का निर्णय लिया गया।

 

शांति मार्च में ये थे शामिल

इस शांति मार्च में कन्हैया त्रिपाठी, प्रो. ललित कुमार भारती, पूर्व पार्षद दिलीप यादव, सुनील मेहरोत्रा, महालक्ष्मी शुक्ला, सुषमा चौधरी, कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी शालिनी यादव, राजकपूर, राजू साव, विनय चौधरी, मदन यादव, सदन यादव, सोनू कपूर, जितेंद्र पाल, राजकुमार पाठक, राजनाथ तिवारी, शशिधर इस्सर आदि शामिल रहे।

धरोहर बचाने को शांति मार्च