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‘हम अपनी जान दे देंगे लेकिन जमीन नहीं देंगे’ …जानें क्यों काशी द्वार परियोजना का विरोध कर रहे 11 गांवों के लोग

Varanasi Kashi Dwar project : वाराणसी में काशी द्वार परियोजना का 11 गांव के लोग विरोध कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि हम अपनी जान दे देंगे...लेकिन जमीनें नहीं देंगे।

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काशी द्वार परियोजना में अपनी जमीनें देने को राजी नहीं किसान, PC- Chatgpt

वाराणसी : वाराणसी मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर एक गांव है, यहां हर घर-खेत, दुकान के बाहर एक पोस्टर लगा है। पोस्टर पर लिखा है कि हम अपनी जान दे देंगे…लेकिन जमीन नहीं। पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी इस विरोध में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। विरोध का कारण है काशी द्वार परियोजना। इस परियोजना के तहत वाराणसी एयरपोर्ट से 5 किलोमीटर दूर नई काशी बसाई जा रही है। यहां स्पोर्ट्स सिटी बनाई जा रही है। इस योजना के अंतर्गत 11 गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है।

गांव वालों का कहना है कि हम अपनी जमीनें और अपना समाज छोड़कर कहीं और क्यों भटके? अगर आपको कुछ करना ही है तो हमारे गांवों को डेवलप कीजिए। उन्हें वर्ल्ड क्लास बनाइए, लेकिन हमारी जमीनें मत लीजिए, हमें मत उजाडो।

चिनौली गांव से लेकर यह पोस्टर बनारस तक लगे हैं। गांव वालों का कहना है कि हम अपनी जमीनें नहीं देंगे। इसके लिए चाहे भले ही हमें अपनी जान देने पड़े। यह पोस्टर हर गली मोहल्ले और खेतों तक में लगे।

पहले जान लें क्या है काशी द्वारा परियोजना

काशी द्वार परियोजना पिंडरा तहसील में बाबतपुर एयरपोर्ट से लगभग 5 किलोमीटर दूर एक महत्वाकांक्षी टाउनशिप और शहरी विकास योजना को रफ्तार देने का मॉडल है। यह अब तक की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है। इस परियोजना के तहत 11 गांवों की 900 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की जानी है। बताया जा रहा है कि यह अब तक की सबसे बड़ी परियोजना मानी जा रही है।

सरकार कम दे रही मुआवजा

गांव के ही एक बुजुर्ग बताते हैं कि हमने अपने जीवन में बहुत उतार चढ़ाव देखे। हमें लगा था कि रिंग रोड आने से हमारे गांव में खुशहाली आएगी। सड़क किनारे हमारे लोगों को रोजगार मिलेगा। लेकिन, हम भूल गए थे कि हम किसान हैं और हमें आगे बढ़ने का कोई अधिकार नहीं है। आज सरकार जो हम लोगों को मुआवजा दे रही है वह बहुत कम है। हमारी जमीनों की कीमत 30 से 40 लाख रुपए है। लेकिन सरकार हमें सिर्फ 3 से 8 लाख तक का ही मुआवजा दे रही है। इस मुआवजे से न तो हम अपना घर बनवा पाएंगे और न ही जमीन खरीद सकेंगे।

80 किसान अब तक कर चुके रजिस्ट्री

आसपास के 11 गांवों का हाल यह है कि वह सरकार द्वारा दिए जा रहे मुआवजे से संतुष्ट नहीं हैं। इसी के चलते वह अपनी जमीन सरकार को नहीं देना चाहते हैं। एक विभागीय अधिकारी बताते हैं कि यहां कुछ लोगों द्वारा किसानों को भ्रमित किया जा रहा है। किसी से भी जबरदस्ती जमीन का अधिग्रहण नहीं कराया जा रहा है। उनकी स्वेच्छा से ही जमीन की रजिस्ट्री करवाई जा रही है। अब तक 80 किसानों ने रजिस्ट्री करवाई है और लगभग 90 करोड़ का मुआवजा उनको दिया जा चुका है। अधिकारी ने यह भी बताया कि सर्किल रेट से 4 गुना ज्यादा मुआवजा दिया जा रहा है।

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