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भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार हुए भगवान जगन्नाथ, काशी में शुरू हुई तीन दिवसीय रथयात्रा, 250 साल पुराना है इतिहास

Lord Jagannath RathYatra in Kashi: काशी में भगवान जगन्नाथ की तीन दिवसीय रथ यात्रा का गुरुवार को शुभारंभ हो गया है। भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर तीन दिन तक काशी का भ्रमण करेंगे।
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Rathyatra in kashi

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Rathyatra in Kashi: काशी में भगवान जगन्नाथ की तीन दिवसीय रथ यात्रा का गुरुवार को शुभारंभ हो गया है। भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर तीन दिन तक काशी का भ्रमण करेंगे। वहीं, सुबह 5 बजे तीनों का पीतांबरी श्रृंगार किया गया। उसके बाद मंगला आरती हुई और श्रद्धालुओं के लिए भगवान का कपाट खोल दिया गया। सुबह से ही श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पहुंचे हुए हैं और करीब 2 किलोमीटर की लंबी कतार लगी हुई है।

हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु

काशी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का गुरुवार को शुभारंभ हो गया है। करीब 5 किलोमीटर की इस रथयात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होने के लिए पहुंचे हुए हैं। वहीं, भगवान का 56 प्रकार के व्यंजनों से भोग लगाया गया। श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में तुलसी के पत्ते और नान खटाई भी दिए गए। इस दौरान मौजूद हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान से सुख समृद्धि और मंगल की कामना की है। इस रथयात्रा मेले में शामिल होने के लिए पूर्व एमएलसी और जगन्नाथ मंदिर के ट्रस्टी बृजेश सिंह अपने परिवार के साथ पहुंचे हुए हैं।

जगन्नाथ मंदिर के ट्रस्टी बृजेश सिंह ने बताया कि यह रथ यात्रा मेला 16, 17 और 18 जुलाई तक आयोजित किया जाएगा। उन्होंने काशी के लोगों से अपील की है कि इस दौरान श्रद्धालु इस मेले में शामिल होकर दर्शन पूजन कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करें। उन्होंने बताया कि यह उनके लिए अत्यंत हर्ष का विषय है कि लगातार दूसरी बार वह इस आयोजन में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के सभी सदस्य इस मेले के सफल आयोजन में लगे हुए हैं। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े, इसके लिए भी तैयारी की गई है।

क्या है इतिहास

बताया जाता है कि काशी के जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा मेले का इतिहास करीब ढाई सौ साल पुराना है। 1765 के बाद पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी ब्रह्मचारीजी का राजा से विवाद हो गया था, जिसके बाद वह भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमा लेकर काशी पहुंचे और अस्सी घाट पर रहने लगे। मुख्य पुजारी के काशी पहुंचने के बाद पुरी के राजा प्रत्येक सप्ताह भगवान जगन्नाथ का प्रसाद काशी भेजना शुरू किया क्योंकि मुख्य पुजारी इस प्रसाद को ग्रहण करते थे। लेकिन उड़ीसा में चक्रवात के कारण एक बार प्रसाद नहीं पहुंच सका। इसी दौरान मुख्य पुजारी के सपने में आकर भगवान ने उनका मंदिर स्थापित कर वही भोग लगाने का संदेश दिया, जिसके बाद से काशी के अस्सी घाट पर भगवान जगन्नाथ का मंदिर स्थापित है।

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