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Gyanvapi Case: मुकदमा, विवाद और इतिहास… ज्ञानवापी केस की ये है पूरी कहानी

Gyanvapi Case: ज्ञानवापी केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर की सर्वे करने की इजाजत दे दी है। आइए जानते हैं क्या है ज्ञानवापी का इतिहास।

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Lawsuit Controversy and History This is the full story of Gyanvapi

Gyanvapi Case: वाराणसी में इतिहास से भी पुराने बाबा विश्वनाथ मंदिर और उसी मंदिर में बना विवादित ढांचा, जिसे लोग ज्ञानवापी परिसर कहते हैं इस समय बहुत चर्चित विषय बना हुआ है। हाईकोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर की ASI सर्वे करने की इजाजत दे दी है। आज हम आपको ज्ञानवापी परिसर का असली इतिहास बताने जा रहे हैं।

ज्ञानवापी परिसर और काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि मां श्रृंगार गौरी मंदिर और ज्ञा वापी मस्जिद को लेकर विवाद क्यों है।

"दिल्ली की रहने वाली राखी सिंह, लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक ने विश्व वैदिक सनातन संघ के जितेंद्र सिंह विसेन के नेतृत्व में 18 अगस्त 2021 को वाराणसी जिला अदालत में केस दाखिल किया था। राखी सिंह बनाम सरकार उत्तर प्रदेश केस के माध्यम से मां श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन और विग्रहों की सुरक्षा की मांग की गई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अजय कुमार मिश्रा को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर ज्ञानवापी परिसर का सर्वे करने का आदेश दिया।"

मां श्रृंगार गौरी मंदिर का इतिहास
असल में मां श्रृंगार गौरी मंदिर बहुत प्राचीन मंदिर है, आदि अनादि काल में काशी का ज्योतिर्लिंग आदि विशेश्वर ***** के नाम से था। वहीं, मां श्रृंगार गौरी भी विराजमान थी। मुगलों के समय इसका अस्तित्व बदला और वहां से कुछ दूर काशी विश्वनाथ की स्थापना हुई। इस दौरान श्रृंगार गौरी ज्ञानवापी परिसर में आ गई, जिसे प्रशासन ने 1998 बंद कर दिया। इस मंदिर के दर्शन पूजन के लिए प्रयासरत्न गुलशन कपूर को 2004 में सफलता मिली। प्रशासन ने केवल एक दिन चैत नवरात्रि के चतुर्थी को दर्शन पूजन की अनुमति दिया। तब से अब तक जनमानस चैत नवरात्रि चतुर्थी के दिन मां की पूजा करते हैं। याचिका दायर करने वाली महिलाओं का कहना है कि हिन्दुओं को रोज उनके भगवान के दर्शन करने का अधिकार है। मां श्रृंगार गौरी के दर्शन उनका मौलिक अधिकार है। इसके लिए किसी विशेष दिन की जरूरत नहीं है यह रोज और सभी के लिए खुला रहना चाहिए।

काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास
काशी या वाराणसी या फिर कहे बनारस तीनों एक ही हैं। बनारस इतिहास से भी पुरना दुनिया का सबसे प्रचीन शहर है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव कैलाश छोड़कर यहां रहने के लिए पहुंचे थे। बनारस में जो काशी विश्वनाथ मंदिर है, उसे मुगल आक्रांतों ने एक-दो बार नहीं 4 बार तोड़ा था। भगवान शिव की नगरी काशी में 12 ज्योतिर्लिंगों में से प्रमुख बाबा विश्वनाथ मंदिर आदिकाल से मौजूद है। किसी को नहीं मालूम की सबसे पहला काशी विश्वनाथ मंदिर किसने बनवाया था। यह प्राचीन काल से अस्तित्व में था।

1100 ईसा पूर्व (1100BC) में जब ईसा मसीह भी पैदा नहीं हुए थे उनके 1100 साल पहले की बात है। मतलब आज से 3120 साल पहले राजा हरिश्चन्द्र ने काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था, और उनके बाद सम्राट विक्रमादित्य ने भी मंदिर का जीर्णोद्धार किया था।