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संतान की प्राप्ति के लिए आस्थावानों ने लगायी लोलार्क कुंड में डुबकी, आधी रात से ही लगी लाइन

लोकार्केश्वर महादेव का किया दर्शन, सुरक्षा के रहे खास बंदोबस्त

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lolark kund

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वाराणसी. संतान प्राप्ति के लिए आस्थावानों ने लोलार्क षष्ठी के दिन लोलार्क कुंड में आस्थावानों ने डुबकी लगायी। आधी रात से ही भक्तों की यहां पर कतार लग गयी थी। बुधवार को दिन में भी डुबकी लगाने का क्रम जारी रहा। स्नान के बाद लोगों ने लोलार्केश्वर महादेव का दर्शन कर संतान का वर मांगा।
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IMAGE CREDIT: Patrika

अस्सी स्थित लोलार्क कुंड का बहुत ही धार्मिक महत्व है। यहां पर स्नान करने के बाद लार्केश्वर महादेव का दर्शन करने वाले चर्म रोग से मुक्ति पाते हैं। यहां पर संतान व पुत्र के लिए भी डुबकी लगायी जाती है और सच्चे मन से प्रभु को याद करते हुए जो भक्त डुबकी लगाता है उसकी सभी मनोकामना पूर्ण होती है। साल में एक बार लोलार्क षष्ठी के दिन ही यहां पर स्नान का महत्व होता है। स्नान के लिए मंगलवार रात १२ बजे से ही महिलाओं व पुरूषों की लाइन लग गयी थी। सुरक्षा की दृष्टि से यहां पर एक साथ कई थानों की फोर्स लगायी गयी थी। कुंड से तीन किलोमीटर दूरी तक बैरिकेडिंग की गयी थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां पर स्नान करने के बाद लोग अपने वस्त्र छोड़ कर जाते हैं। इसी अनुसार लोगों ने स्नान कर यही पर पुराने वस्त्र का त्याग कर नवीन वस्त्र पहने और लार्केश्वर महादेव का दर्शन करने के बाद वहां से निकल गये।
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बेहद खास है लोलार्क कुंड की कहानी
लोलार्क कुंड को सूर्य कुंड भी कहते हैं। एक धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां पर एक राजा यहां पर राज करते थे और यहां पर कोई देवी व देवता नहीं थे। भगवान शिव ने यहां पर देवी व देवताओं को भेजा। सूर्य देव सबसे पहले यहां पर पहुंचे थे। सूर्य देव ने यहां पर शिवलिंग की स्थापना कर हजारों वर्ष तक तपस्या की थी। सूर्यदेव ने जिस शिवलिंग की स्थापना की थी उसका नाम लोलार्केश्वर महादेव पड़ा। एक और धार्मिक कहानी के अनुसार पश्चिम बंगाल स्थित कूच बिहार स्टेट के राजा चर्म रोग से पीडि़त थे और उन्होंने लोलार्क कुंड में स्नान किया था तो उनका चर्म रोग ठीक हो गया था साथ ही उन्हें पुत्र की भी प्राप्ति हुई थी। कहा जाता है कि इस कुंड का निर्माण सोने की ईंट से कराया गया था।
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