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जंगल के सीने पर मुलायम सिंह यादव यूनिवर्सिटी बना रहा बाहुबली 

- मिर्जापुर में बीच जंगल में बनने लगा मुलायम सिंह यादव विश्वविद्यालय,जहाँ था भालू वहां माफिया बना रहे हाउसिंग काम्प्लेक्स 

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Awesh Tiwary

Jul 22, 2016

illegal construction of university in forest land

illegal construction of university in forest land

मडिहान मिर्जापुर से लौटकर आवेश तिवारी
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के मडिहान सुरक्षित वनक्षेत्र में कायदों को ताक पर रखकर सुरक्षित वन भूमि पर कब्ज़ा करके मुलायम सिंह यादव विश्वविद्यालय स्थापित किया जा रहा है।आश्चर्यजनक यह है कि जिस इलाके में करोड़ों रूपए की लागत से इस निजी विश्वविद्यालय का निर्माण किया जा रहा है उस इलाके में सघन वन क्षेत्र तो है ही भालू ,तेंदुआ ,चिंकारा आदि जंगली जानवर भी बहुतायत में हैं।कैमूर वन जीव अभ्यारण्य से सटे इस इलाके में लगभग एक हजार एक एकड़ में हो रहे इस निर्माण कार्य पर वन विभाग के अधिकारियों ने खामोशी ओढ़ रखी है।आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि जिस स्थान पर इस निजी विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है उससे महज 12 किमी की दूरी पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का साऊथ कैम्पस है। इस निर्माण पर प्रभागीय वनाधिकारी मिर्जापुर आर के पांडे का कहना था कि हमने इस सम्बन्ध में अपने रेंज अधिकारी से जानकारी मांगी थी उनके द्वारा हमें बताया गया है कि वो निर्माण कार्य वनसीमा के बाहर है लेकिन तस्दीक के लिए पूरे इलाके के पुनः नापजोख के आदेश दिए गए हैं। निर्माणस्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि यह निर्माण चंदौली के पूर्व बाहुबली सांसद रामकिशुन यादव द्वारा कराया जा रहा है लेकिन उनके साथ इसमें अन्य लोगों का भी धन लगा है। इस सम्बन्ध में रामकिशुन यादव से बात की गई तो उन्होंने मुंह खोलने से इनकार कर दिया |आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि खुद जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को भी नहीं पता है बड़े पैमाने पर हो रहे इस निर्माण कार्य को कौन करा रहा है।
पूर्व सपा सांसद रामकिशुन का मुलायम प्रेम
पत्थर और बालू की अवैध खदानों का गढ़ कहे जाने वाले यूपी के सोनभद्र -मिर्जापुर जिले में जंगलों को नंगा करने की न रुकने वाले कवायद के बीच चौंका देने वाली चीज सामने आई है ।यूपी में समाजवादी पार्टी की सरपरस्ती में बाहुबलियों ने सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के ही नाम पर जंगल में यूनिवर्सिटी खड़ा करने की कोशिशें शुरू कर दी हैं |इस निर्माण के पीछे समाजवादी पार्टी के जिस पूर्व सांसद का नाम आ रहा है उसके खिलाफ 10 से ज्यादा मुक़दमे हैं।दुखद यह है जंगल जमीन पर कब्ज़ा करने की जुगत में न सिर्फ बेशकीमती पेड़ों को काट दिया गया है बल्कि समूचे इलाके में बाउंड्रीवाल खड़ी कर दी गई है ,नहीं भुला जाना चाहिए यह वही इलाका है जहाँ गोयनका के बिजली कारखाने के निर्माण पर इसलिए न्यायालय ने रोक लगा दी है क्योंकि वो इलाका भी सुरक्षित वन क्षेत्र में ही शुमार हैं।इस विश्वविद्यालय के निर्माण में समाजवादी पार्टी के जिस पूर्व सांसद रामकिशुन यादव का नाम आ रहा है वो चंदौली के हिस्ट्रीशीटर रहे हैं उनके खिलाफ अलग अलग दस मुक़दमे दर्ज हैं जिनमे हत्या के प्रयास और डकैती का मामला भी शामिल हैं ,हत्या के प्रयास का मुकदमा तो पिछले 25 वर्षों से चल रहा है|
जहाँ था भालू वहां बसाए जायेंगे इंसान
मडिहान में जंगल जमीन पर कब्ज़ा करके विश्वविद्यालय के निर्माण की घटना अकेली नहीं है।इस यूनिवर्सिटी के अगल बदल एक किलोमीटर की दूरी पर यूपी के कई बाहुबलियों और माफियाओं ने जमीन पर कब्ज़ा जमाकर आवासीय काम्प्लेक्स के निर्माण का बोर्ड भी लगा दिया है। इनमे सबसे चर्चित नाम शाइन सिटी इन्फ्रा प्राइवेट लिमिटेड का है जो यूपी के अलग अलग शहरों में आवासीय काम्प्लेक्स कागौरतलब है कि इसके मैनेजिंग डायरेक्टर नसीम को लखनऊ में कोर्ट के आदेश पर गैरजमानतीय धाराओं में गिरफ्तार किया गया था उसके खिलाफ अपहरण और धोखाधड़ी समेत कई अन्य मामले चल रहे हैं। गौरतलब है कि जिस इलाके में मुलायम सिंह विश्वविद्यालय और शाइन सिटी अपना आवासीय काम्प्लेक्स बना रही है उससे कुछ ही दूरी पर विश्व प्रसिद्द वींढम फाल मौजूद है जो पूर्वी उत्तर प्रदेश में पर्यटन का बहुत बड़ा केंद्र है।शाइन सिटी का दावा है कि बीच जंगल में मौजूद अपने आवासीय काम्प्लेक्स में वो स्विमिंग पूल और पार्क के अलावा क्लब भी बनाएगी। शाइन सिटी पर पिछले साल सर्विस टैक्स और एक्साइज इंटेलीजेंस के कंबाइंड आपरेशन में करोड़ों रुपये का हेर फेर भी मिला था पिछले वर्ष 15 सितम्बर को की गई छापेमारी में कई करोड़ रूपए के सर्विस टैक्स की चोरी पकड़ी गई थी।
अधिकारियों की अजीबोगरीब खामोशी
मडिहान में जिस जगह पर यह निर्माण कार्य किये जा रहे हैं दरअसल देश के सबसे बड़े सेंचुरी क्षेत्र में शुमार कैमूर वन्य जीव अभ्यारण्य इससे सटा हुआ है।अपने समृद्ध वन विस्तार और जंगली जानवरों की बहुलता के लिए प्रसिद्द इस इलाके में पिछले पांच वर्षों के दौरान जिस तरह से कब्जे की घटनाएं बढ़ी हैं वो चौंकाती है। पिछले तीन वर्षों के दौरान इस वन क्षेत्र में जंगल जमीन की किस्म बदलने के भी मामले सामने आये हैं ,जिसमे अधिकारियों ने वानिकी की जमीन को गैर वानिकी की जमीन घोषित कर बेचने की संस्तुति कर दी।बड़े पैमाने पर हो रहे इस निर्माण कार्य के सम्बन्ध में जब मुख्य वन संरक्षक मिर्जापुर वृत्त आर के ठाकुर से बात की गई तो उन्होंने पहले इस सम्बन्ध में जानकारी होने से इनकार किया ,उनका यह भी कहना था कि थोडा बहुत वन भूमि का अतिक्रमण हुआ होगा।लेकिन अगर किसी ने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कारवाई की जाएगी।

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