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पनीर के फूल से सर्वाइकल कैंसर का इलाज, बीएचयू में औषधीय पौधे की नई किस्म का ईजाद, नैनो बायोटेक्नोलॉजी का उपयोग

काशी हिंदू विश्वविद्यालय में इस पौधे की मेडिसिनल क्वालिटी को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने में सफलता मिली है। बीएचयू में पौधे के उत्पादन को भी बढ़ाया गया है। ऋष्यगंधा का पौधा नौने-बायो टेक्नोलॉजी पर आधारित हाई क्वालिटी का है। सर्वाइकल कैंसर रोग में यह एलोपैथी दवा से भी बेहतर काम करता है।

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Nano Biotechnoogy Use in BHU For Medicinal Quality of Plants

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कैल्शियम के स्रोत से भरपूर पनीर अब न सिर्फ हड्डियों को मजबूत करने के काम आएगा बल्कि इसका फूल भी कई जटिल रोगों का इलाज करेगा। सर्वाइकल कैंसर, बीपी, शुगर और इम्युनिटी को बेहतर रखने में इसका उपयोग किया जा सकता है। इसका नाम ऋष्यगंधा पौधा है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में इस पौधे की मेडिसिनल क्वालिटी को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने में सफलता मिली है। बीएचयू में पौधे के उत्पादन को भी बढ़ाया गया है। ऋष्यगंधा का पौधा नौने-बायो टेक्नोलॉजी पर आधारित हाई क्वालिटी का है। सर्वाइकल कैंसर रोग में यह एलोपैथी दवा से भी बेहतर काम करता है। बॉटनी विभाग की प्रो. शशि पांडेय और उनकी टीम के रिसर्च में दावा किया गया है कि इस दवा का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता।

रोगों से लड़ने की क्षमता

प्रो. पांडेय के अनुसार, इस पौधे में रोगों से लड़ने की क्षमता काफी तेज होती है। लेकिन पिछले कई दशकों से इस पौधे का इस्तेमाल जटिल स्वास्थ्य समस्याओं जैसे मधुमेह और कैंसर में होता रहा है। लापरवाही और ठीक से न रखने के कारण आज यह संकटाग्रस्त पौधों की श्रेणी में आ चुका है। प्रो. पांडेय और उनकी टीम ने इस पौधे पर जो रिसर्च किया है, वह 'मटेरियल साइंस एंड इंजीनियरिंग सी', 'प्लांट सेल रिपोर्ट्स फिजियोलॉजी' और 'मॉलिक्यूलर बायोलॉजी ऑफ प्लांट्स' जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। प्रो. पांडेय ने आठ साल पहले अपनी रिसर्च स्कॉलर दीपिका त्रिपाठी के साथ इस पौधे पर रिसर्च वर्क शुरू किया था।

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टिश्यू कल्चर से पौधे के उत्पादन को बढ़ाने की क्षमता

पौधे के उत्पादन को बढ़ाने के लिए लैब में सबसे पहले आर्टिफिशियल टिश्यू कल्चर मेथड का प्रयोग किया गया। इसके साथ ही इन पौधों को माइक्रो नैनो पार्टिकल का संश्लेषण कर इसकी क्वालिटी को बेहतर किया गया है। लैब में आर्टिफिशियल इको सिस्टम तैयार किया गया। यहां पर संश्लोषित नैनो पार्टिकल और अल्ट्रा वायलेट किरणों की सूक्ष्म मात्रा के साथ ट्रीटमेंट किया गया। इस एक्सपेरिमेंट के बाद देखा गया कि पौधे में जो औषधीय गुण वाले यौगिक हैं, उनमें 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है। प्रो. पांडेय की नई टीम में विपिन मौर्या, लकी शर्मा, आदि छात्र हैं।

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