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काशी में गंगा तट पर सूर्योपासना और मां गंगा को वंदन कर नव संवत्सर 2079 का अभिनंदन

नव संवत्सर 2079 का अभिनंदन काशी में मां गंगा के तट पर भगवान भास्कर को अर्घ्यदान, गंगा पूजन, आरती और हवन के साथ किया गया। काशी के दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट और शंकराचार्य घाट पर मुंहअंधेरे से ही भक्त जनों का जुटान हो गया था। जैसे ही पूरब की ओर भगवान भास्कर का उदय हुआ, पूरा वातावरण वैदिक मंत्रों से गूंज उठा। हर-हर महादेव का उद्घोष भी हुआ। साथ ही मां गंगा की अभ्यर्थना की गई। साथ ही हवन अनुष्ठान से नव वर्ष का अभिनंदन किया गया।

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भगवान भास्कर को अर्घटान संग नव संवत्सर का अभिनंदन

भगवान भास्कर को अर्घटान संग नव संवत्सर का अभिनंदन

वाराणसी. नव संवत्सर 2079 का स्वागत शनिवार को सूर्योदय काल में भव्य तरीके से गंगा तट पर किया गया। भगवान शिव की नगरी काशी में हिंदू नववर्ष का आगाज अलग ढंग से ही किया गया। काशी के प्रसिद्ध दशाश्वमेघ घाट पर ब्रह्ममुहर्त में गंगा शुद्धिकरण, पर्यावरण शुद्धिकरण, आत्मिक और आध्यात्मिक शुद्धिकरण संग विश्व शांति की मंगल कामनाओं के साथ हवन अनुष्ठान किया गया। अनुष्ठान के बाद सभी ने भगवान् भाष्कर को जल अर्पण कर दुधाभिषेक किया। गंगोत्री सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस हवन-अनुष्ठान में बड़ी तादाद में भक्तजन शामिल हुए।

सूर्य को नमन कर, गंगा जल से किया गया अभिसिंचित

काशी के दशाश्वमेध घाट पर शनिवार को प्रातः गंगोत्री सेवा समिति ने भगवान भास्कर की लालिमा के साथ सूर्य को नमन करते हुए गंगा जल से अभिसींचित किया। दशाश्वमेध घाट पर बैदिक ब्राम्हणों ने सूर्य नमस्कार के बाद वैदिक मंत्रों की अनुगूंज के साथ हवन, गंगा शोषड्स पूजन और दुधाभिषेक के साथ गंगा की आरती कर नव संवत्सर के आगमन का स्वागत सनातनी परंपरा के अनुसार किया गया। पूजन कार्य पं सीताराम शास्त्री ने किया जबकि पूजन में पं किशोरीरमन दुबे, दिनेश दुबे, डॉ संतोष ओझा, राजेश शुक्ला, हरदत्त द्विवेदी और शिवम आदि मौजूद रहे।

अस्सी घाट पर संस्कार भारती और सुबह-ए-बनारस की ओर से हुआ नव संवत्सर का अभिनंदन

उधर अस्सी घाट पर संस्कार भारती और सुबह-ए-बनारस ने मिल कर नव संवत्सर का स्वागत भगवान भास्कर को अर्घदान और मां गंगा के पूजन से किया। यहां भी श्रद्धालुओं का जमघट लगा रहा। अब इसी घाट पर शाम को विविध रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।

शंकराचार्य घाट पर बटुको ने किया अर्घ्यदान और गंगा पूजन
शंकराचार्य घाट पर ज्योतिष एवं शारदापीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के नेतृत्व में ब्रह्ममुहूर्त में बटुकों ने सूर्य नारायण व मां गंगा का पूजन व आरती किया।