
प्रो पीके मिश्र
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
वाराणसी. बनारस की माटी में जन्म लिए, पढे-लिखे फिर आईटी बीएचयू, आईआईटी रुड़की और आईआईटी बांबे से उच्च शिक्षा ग्रहण की। फिर आईटी बीएचयू में अध्यापन शुरू किया। छात्र-छात्राओं के बीच लोकप्रिय प्रो मिश्र, यूपी सरकार के गंगा प्रदूषण अभियान (नमामि गंगे) से भी जुड़े और कानपुर से बनारस तक गंगा जल की स्थिति का अध्ययन किया। अनेक स्टार्ट अप शुरू कराया। आईआईटी बीएचयू में उद्यमिता प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अब वो एकेटीयू के कुलपति नियुक्त किए गए हैं। फिलहाल वो झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, रांची में कुलपति हैं।
समाजोपयोगी शोध पर होगा जोर
पत्रिका से खास बातचीत में प्रो मिश्र ने बताया कि अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी के छात्रों को उद्मिता विकास से जोड़ना, स्टार्टअप के लिए प्रेरित करना और बेहत व उच्च गुणवत्ता की तकनीकी शिक्षा मुहैया करना प्राथमिकता होगी। छात्र-छात्राओं को समाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए समाज के लिए उपयोगी शोध कराने को प्रेरित करने का प्रयास किया जाएगा।
15-20 दिन में कार्यभार ग्रहण करेंगे
उन्होंने बताया कि फिलहाल बतौर कुलपति, झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, रांची से कार्यभार मुक्त होने के बाद आईआईटी बीएचयू से अनुमति हासिल करनी होगी। इसमें करीब 15-20 दिन लग जाएंगे। उसके बाद ही अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कुलपति का कार्यभार ग्रहण करेंगे।
2020 से झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में हैं कुलपति
प्रो प्रदीप कुमार मिश्र, रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी,में विगत 23 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं। फिलहाल वह झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, रांची में 15 दिसंबर 2020 से कुलपति का कार्यभार निर्वहन कर रहे हैं।
प्रो मिश्र की शैक्षिक यात्रा
प्रो मिश्र का जन्म अगस्त 1964 में वाराणसी में हुआ। यहीं राजकीय क्वींस इंटर कॉलेज से उन्होंने इंटरमीडिएट किया। फिर 1986 में रुड़की विश्वविद्यालय से रासायनिक अभियांत्रिकी में स्नातक, 1988 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई से परास्नातक तथा 1995 में प्रौद्योगिकी संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधी अर्जित की। कुछ वर्षों तक औद्योगिक कल कारखानों में सेवा देने के पश्चात प्रो मिश्र ने 1997 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में अध्यापन प्रारंभ किया और2010 में पूर्णकालिक प्रोफेसर तथा 2016 में उच्चतम समूह के प्रोफेसर के रूप में प्रतिष्ठित हुए।
75 से ज्यादा एससीआई पब्लिकेशन, दो दर्जन किताबें प्रकाशित
शिक्षण के काल में अबतक 75 से ज्यादा एससीआई पब्लिकेशन, दो दर्जन किताबो तथा अनेकानेक अध्याय लिखे हैं। प्रो प्रदीप कुमार मिश्र ने लगभग सभी प्रमुख विज्ञान एवम् प्रद्योगिकी संस्थानों के प्रोजेक्ट एवम् कंसल्टेंसी पूरे किए हैं, जिनका मूल्य 20 करोड़ से भी ज्यादा है। प्रो प्रदीप कुमार मिश्र ने 20 छात्रों की चक्रवर्ती, 50 से ऊपर छात्रों के परास्नातक शोध को सुपरवाइज किया है। आपने विभिन्न देशों यथा जर्मनी, अमेरिका, दुबई इत्यादि की यात्रा शोध एवम् प्रशिक्षण के लिए किया है।
केंद्रीय प्रदूषण संगठन के सदस्य
प्रो मिश्र को केंद्रीय प्रदूषण संघटन नई दिल्ली ने कई महत्वपूर्ण समितियों का सदस्य एवम् अध्यक्ष मनोनित किया है। प्रो प्रदीप कुमार मिश्र, पर्यावरण एवम् वन मंत्रालय की अति महत्वपूर्ण समिति, एक्सपर्ट अप्रेजल समिति, इंडस्ट्री 3 के भी सदस्य हैं। आपने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की महत्वपूर्ण कार्यक्रम लीप में भी सहभागिता की है और पेन स्टेट विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण किया है।
अर्जित किए अनेक पुरुस्कार
प्रो मिश्र को भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान अहमदाबाद के वर्ष 2020 के प्रतिष्ठित वी जी पटेल स्मृति उद्यमिता प्रशिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया । आपने 2017 की प्रतिष्ठित शिरीन गढ़िया स्मृति पर्यावरण पुरस्कार भी अर्जित की है। गैर परंपरागत ऊर्जा मंत्रालय ने 2005 में आपको हिंदी पुस्तक लेखन के लिए द्वितीय राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया था। आप निस्बुद, एमएसएमई भारत सरकार, प्रोजेक्ट माला इत्यादि के बोर्ड ऑफ गवर्नर के सदस्य रहे हैं।
उद्यमिता संवर्धन प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण योगदान
उद्यमिता प्रशिक्षण में आपने 2004 से ही अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है और आप मालवीय उद्यमिता संवर्धन केंद्र, वाराणसी के सचिव हैं। भारतीय संस्कृति खासकर काशी की संस्कृति के प्रचार एवम् प्रसार के लिए आपने काशीकथा नामक एक वेबसाइट का भी निर्माण किया हैं। खुशी की बात है की भारत कोश भी काशी से जुड़ी जानकारी के लिए काशिकथा डॉट कॉम को संदर्भित करता है। सम्प्रति प्रो मिश्र अपने शिक्षण कार्य के साथ समाज में उद्यमिता और प्रशिक्षण कार्य को बढ़ावा देने के लिए तीन केंद्रों की स्थापना में जुटे हैं।
जानें प्रो मिश्र के बारे में
-केमिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी-1995
-एमटेक केमिकल इंजीनियरिंग पेट्रोलियम एंड कोल, आईआईटी बांबे- 1998
-बीई केमिकल इंजीनियरिंग आईआईटी रुड़की-1986
अनुभव
-डीएसटी रिसर्च फेलो आईआईटी बांबे
-कंसल्टेंट, सिग्मा कंसल्टेंट मुंबई-1988-1990
-एसआरएफ, आईटी बीएचयू-190-95
-रिसर्च साइंटिस्ट, सगीता बायोटेक, कोकाता-1995-96
-प्रवक्ता आईटी बीएचयू- 1997-2004
-रीडर, आईटी बीएचयू, 2004-07
-असोसिएट प्रोफेसर, आईटी बीएचयू-2007-10
-प्रोफेसर आईआईटी बीएचयू-2010-16
-प्रोफेसर, एचएजी आईआईटी बीएचयू- 2016 से अब तक
- कुलपति, झारखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, रांची- 15 दिसंबर 2020 से
Published on:
06 Jan 2022 03:18 pm
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