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पंचक नक्षत्र: इस दिन से हो रही पंचक की शुरूआत, भूलकर भी न करें ये काम

जानिए कब तक रहेगा पंचक

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Panchak Nakshatra

Panchak Nakshatra

वाराणसी. हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले ज्योतिष गणना का अध्ययन कर शुभ और अशुभ मुहूर्त देखा जाता है। ज्योतिष के अनुसार शुभ मुहूर्त में किया जाना वाला कोई नया काम अच्छा परिणाम देता है वहीं अशुभ समय में काम करने पर असफलता मिलती है। आपको बतादें कि ज्योतिष में पंचक को अशुभ माना जाता है। पंचक 5 खास नक्षत्र में लगता है जब धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र आते हैं। जिसमें कोई भी शुभ काम करने की मनाही होती है। 11 सितम्बर बुधवार के शाम 5.00 बजे से पंचक शुरू हो जाएगा और 20 सितम्बर को शाम 5.30 पर खत्म होगा।

पंचक के प्रकार
राज पंचक- ज्योतिष के अनुसार पंचक भी अलग-अलग प्रकार के होते हैं। सोमवार से शुरू होने वाले पंचक को राज पंचक कहते हैं।


रोग पंचक- अगर पंचक का प्रारंभ रविवार से हो रहा होता है तो उसे रोग पंचक कहा जाता है।


अग्नि पंचक- जो पंचक मंगलवार को शुरू हो उसे अग्नि पंचक कहते है इस दौरान आग लगने का भय रहता है। इस दौरान औजारों की खरीदारी, निर्माण या मशीनरी का कार्य नहीं करना चाहिए।


मृत्यु पंचक और चोर पंचक - इसके अलावा मृत्यु पंचक और चोर पंचक होता है। मृत्यु पंचक शनिवार और चोर पंचक शुक्रवार को होता है। दोनो काफी घातक और अशुभ पंचक माने जाते हैं।

पंचक में भूलकर भी ना करें ये काम
- पंचक में चारपाई बनवाना अच्छा नहीं माना जाता। ऐसा करने से कोई बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
- पंचक के दौरान जिस समय घनिष्ठा नक्षत्र हो उस समय घास, लकड़ी आदि जलने वाली वस्तुएं इकट्ठी नहीं करना चाहिए, इससे आग लगने का भय रहता है।
- पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नही करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है।
- पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, उस समय घर की छत नहीं बनाना चाहिए।
- पंचक में शव का अंतिम संस्कार करने से पहले किसी योग्य पंडित की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। यदि ऐसा न हो पाए तो शव के साथ पांच पुतले आटे या कुश से बनाकर अर्थी पर रखना चाहिए।

ये शुभ काम पंचक के दौरान किया जा सकता है
कुछ नक्षत्रों में पंचक लगने पर शुभ कार्य किए जा सकते हैं। पंचक में आने वाला उत्तराभाद्रपद नक्षत्र वार के साथ मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बनाता है, वहीं धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र यात्रा, व्यापार, मुंडन आदि शुभ कार्यों में श्रेष्ठ माने गए हैं। पंचक को भले ही शुभ नहीं माना जाता हो, लेकिन इस दौरान सगाई, विवाह आदि शुभ कार्य भी किए जाते हैं।