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चार साल पहले लिए गये टेंडर का भी रखा गया हिसाब, जेल से ही अखिलेश यादव के पूर्व मंत्री के नाम से मांगा गया कमीशन

पूर्व मंत्री के कार्यकाल में खनन का टेंडर लेने वाले को लखनऊ जेल से मिली थी धमकी, पूछताछ के लिए जायेगी पुलिस की टीम

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Gayatri Prasad Prajapati

Gayatri Prasad Prajapati

वाराणसी. अखिलेश यादव के लिए पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति फिर सिरदर्द बन सकते हैं। लखनऊ जेल से रंगदारी मांगने वाले प्रकरण में पुलिस की टीम जल्द ही पूर्व मंत्री से पूछताछ कर सकती है। दशाश्वमेध पुलिस ने पहले ही इस मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया है। वर्ष 2014 मे लिए गये टेंडर का कमीशन मांगने के लिए जेल से फोन किया गया था जिसमे फोन करने वाले ने खुद अपना नाम गायत्री प्रजापति बताया था।
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सपा सरकार में गायत्री प्रसाद प्रजापति के चलते अखिलेश यादव को परेशानी का सामना करना पड़ा था। अखिलेश यादव ने गायत्री प्रसाद प्रजापति को मंत्री पद से भी हटा दिया था लेकिन मुलायम सिंह यादव के दबाव में फिर से मंत्री पद देना पड़ा था बीजेपी ने इस मुद्दे को जमकर भुनाया था। यूपी में अब सरकार बदल गयी है सपा की जगह अब सीएम योगी आदित्यनाथ को शासन चल रहा है। बनारस के जंगमबाड़ी निवासी अरविंद तिवारी को ९ जून को एक फोन आता है। फोन करने वाला खुद को पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति बताते हुए कहता है कि लखनऊ जेल में आकर मिलो। कमीशन भी लेते आना नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतना होना। फोन आने के बाद पीडि़त ने पुलिस को तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की थी लेकिन पूर्व मंत्री के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया था इसके बाद पीडि़त ने जब सीएम योगी आदित्यनाथ व डीजीपी ओपी सिंह को पत्र लिख कर कार्रवाई की मांग की थी इसके बाद सक्रिय हुई पुलिस ने पूर्व मंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस सूत्रों की माने तो सर्विलांस से पता चल चुका है कि पीडि़त को लखनऊ जेल से ही फोन किया गया था इसलिए अब लखनऊ जेल जाकर पुलिस पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति से पूछताछ कर सकती है।
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टेंडर होने के चार साल बाद फोन करके मांगा कमीशन
सपा सरकार में गायत्री प्रसाद प्रजापति के पास ही खनन विभाग था। वर्ष 2014 में सोनभद्र के चोपन के 36 एकड़ बालू खनन का टेंडर हुआ था जो अरविंद तिवारी को मिला था। अरविंद तिवारी के अनुसार टेंडर मिलने के बाद विभिन्न विभाग से एनओसी लेने में उसे ढाई साल लग गये। एनओसी के लिए उसे दस लाख रुपया तक खर्च करना पड़ा था जब सभी जगहों से एनओसी मिल गयी थी तो यूपी में सरकार बदल गयी और उसके बाद खनन नीति बदल गयी। इसके चलते अरविंद तिवारी को मिला हुआ टेंडर निरस्त हो गया। अरविंद के अनुसार वह खनन नहीं कर पाया था और एनओसी के लिए खर्च किये गये दस लाख रुपये भी डूब गये थे। टेंडर लेने से एनओसी तक का सारा कार्य अपने बल पर किया था इसमे पूर्व मंत्री की कोई भूमिका नहीं थी इसके बाद भी जेल से कमीशन के लिए फोन किया गया था।
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बीजेपी बना सकती है मुद्दा
पीडि़त की तहरीर को छोड़ दिया जाये तो इस मामले में अभी गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ सबूत नहीं मिला है। पुलिस की पूर्व मंत्री से पूछताछ के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है। यदि पूर्व मंत्री से सीधा कमीशन मांगने का तार जुड़ता है तो लोकसभा चुनाव २०१९ के पहले बीजेपी इसे बड़ा मुद्दा बना सकती है।
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