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Mau Saras News : मऊ के रामसमुझ का भी दोस्त है सारस, एक ही थाली में खाता है खाना, भावुक कर देगी ये कहानी

Mau Saras News : आरिफ के सारस को वन विभाग ने कानपुर के चिड़ियाघर पहुंचा दिया। इसी बीच अब मऊ में रामसमुझ और सारस की दोस्ती की चर्चा शुरू हो गई है। आइए बताते हैं इसकी पूरी कहानी...

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Ramsamuj friend stork in Mau

मऊ के रामसमुझ के साथ अठखेलियां करता सारस

Mau Saras News : आरिफ के सारस को वन विभाग ने कानपुर के चिड़ियाघर पहुंचा दिया। इसी बीच अब मऊ में रामसमुझ और सारस की दोस्ती की चर्चा शुरू हो गई है। दरअसल, मऊ के घोसी विधानसभा क्षेत्र के बरईपार गांव निवासी रामसमुज के घर पर एक सारस रहता है। इससे रामसमुझ की पक्की दोस्ती है। यानी अमेठी के आरिफ की तरह यहां भी सारस रामसमुझ के साथ ही खाता और सोता है। इसकी कहानी अमेठी के आरिफ से मिलती-जुलती है। रामसमुझ बताते हैं कि यह सारस डेढ़ साल पहले उन्हें घायलावस्‍था में मिला था। उसके पैर में कांटा चुभा था। रामसमुझ ने कांटा निकालने का प्रयास किया तो सारस ने उन्हें खूब चोंच मारी। हालांकि बाद में उसे वह अपने घर ले आए। यहां मरहम पट्टी की। करीब 15 दिन में सारस ठीक हो गया। इसके बाद सारस रामसमुझ को छोड़कर कहीं नहीं गया।

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15 दिन में दिल में बन गई जगह
रामसमुज के अनुसार डेढ़ साल पहले वो और उसके दोस्त गांव के बाहर थे। जहां उन्हें सारस गंभीर अवस्था में दिखा। वह अपने पैर को घसीट कर चल रहा था। उसके पैर से ब्लड भी आ रहा था। रामसमुझ बताते हैं "हाथ में रूमाल बांधकर मैं उसके करीब गया तो उसने चोंच मारनी शुरू की, पर मैंने हिम्मत नहीं हारी और उसके पैर का कांटा निकाल दिया जिससे और तेजी से ब्लड आने लगा। इसपर मैंने उसके पैर में अपना रुमाल बांध दिया और उसे गाड़ी पर लादकर दोस्त की मदद से घर ले आया।"

घर लेकर उसके घाव पर सूखने वाली दवा लेकर डाली और 15 दिन में उसका घाव भर गया। इस दौरान वह मेरे घर में रहा और मेरे साथ सोना और खाना खाना उसका रूटीन बन गया। उसके बाद वह पहले तो घर से बाहर निकलने में घबराया पर फिर मै जब भी निकलता हूं तो वह मेरे साथ निकल जाता है। अब तो वह गांव वालों से भी नहीं डरता और उनके दिए सामान को भी खाकर मस्त हो जाता है।

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गांव का चहेता है सारस
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मऊ के घोसी तहसील से 3 किलोमीटर दूर स्थित बरईपार गांव में रहने वाले रामसमुज को डेढ़ साल पहले सारस घायल अवस्था में मिला था। यह सारस सिर्फ रामसमुज का ही नहीं पूरे बरईपार का चहेता है। गांव वालों के साथ काफी घुला- मिला हुआ है। ऐसे में वह कहीं भी स्वछन्द विचरण करता है।

पूरे गांव का दुलारा है सारस
रामसमुज का सारस पूरे गांव का दुलारा है। ग्रामीणों ने बताया कि एक बार सारस कहीं चला गया था जिसके बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया था। सभी परेशान थे और बच्चे रो रहे थे, लेकिन अचानक सारस लौट औए और सभी ने राहत की सांस ली।