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BHU में शोध, ह्रदय रोगियों के लिए वरदान साबित हो रही ‘ह्रदय महाकषाय औँषधि’

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हृदय रोग विभाग में शोध चल रहा है। हार्ट की बीमारी पर रोकने के उद्देश्य से आयुर्वेद संकाय और IMS बीएचयू के चिकित्सकों की ओर से शोध किया जा रहा है।

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इंस्टीट्यूट आफ एमिनेंस के तहत हृदय महाकषाय औषधि के प्रभाव का मूल्यांकन भी कराया जा रहा है। हृदय रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। पहले यह बीमारी 50 साल से कम उम्र वालों की मानी जाती थी, लेकिन अब इसकी जद में युवा ही नहीं बल्कि किशोर भी आ रहे हैं।

हार्ट अटैक से आए दिन लोगों की मौत हो रही है। कोई दिल में छेद तो कोई कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से परेशान है। ऐसे मरीजों के लिए बीएचयू आयुर्वेद संकाय में तैयार की गई हृदय महाकषाय औषधि वरदान साबित हो रही है। मरीजों को यह निःशुल्क देने के साथ ही उनकी निगरानी भी की जा रही है।

शोध परियोजना के वैद्य सुशील कुमार दूबे ने बताया, "हृदय महाकषाय को लेकर संस्थान स्तर पर इंस्टीट्यूट एथिकल समिति और क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री में भी रजिस्टर किया जा चुका है। संकाय प्रमुख प्रो. केएन द्विवेदी के निर्देशन में हुए शोध कार्य में हृदय रोग विभाग से डॉ. सुयश त्रिपाठी और डॉ. दिव्या सोनी भी शामिल हैं।"

तैयार है दवा के 100 डिब्बे
फिलहाल दवा के 100 डिब्बे तैयार हैं। वैद्य सुशील दूबे के अनुसार, एक डिब्बा 60 ग्राम का है। इसे सुबह और शाम तीन ग्राम लेना है। 10 मरीजों को यह दवा दी गई है, जिसका प्राथमिक स्तर पर सार्थक परिणाम देखने को मिला है। 1200 लोगों को देने का लक्ष्य रखा गया है।

क्या है हृदय महाकषाय
वैद्य सुशील कुमार दूबे ने बताया, "10 खट्टे रस वाले फलों के इस्तेमाल से औषधि बनाई गई है। इसमें अनार, नींबू, आम, इमली, बेर, बड़हर को शामिल किया गया है। चरक में बताया गया है कि ये औषधियां हृदय के लिए लाभकारी हैं, ऐसा शास्त्रों में भी लिखा है। दो ग्रुप में मरीजों को दवाएं दी जाएंगी। एक ग्रुप में हृदय रोग की एलोपैथिक दवा खाने वाले, दूसरे ग्रुप के मरीज को केवल हृदयमहाकषाय दिया जाएगा। दस मरीजों पर सुखद परिणाम आए हैं। आने वाले दिनों में और बेहतर परिणाम की उम्मीद जगी है।"