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रैदास जयंती समारोहः कांग्रेस नेता राहुल और प्रियंका गांधी की सुरक्षा में चूक

संत रैदास जयंती समारोह में शामिल होने वाराणसी के सीरगोवर्धनपुर पहुंचे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की सुरक्षा में बड़ी चूक का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के आला अफसरों का कहना है कि किससे, कहां और कैसी चूक हुई है। उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

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राहुल गांधी और प्रियंका गांधी

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी

वाराणसी. माघी पूर्णिमा पर वाराणसी के सीरगोवर्धनपुर स्थित संत रैदास मंदिर पहुंचे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और राष्ट्रीय महासचिव व यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा के लौटने के साथ ही उनकी सुरक्षा में चूक का मामला प्रकाश में आया है। दरअसल राहुल गांधी अपने काफिले के साथ सीरगोवर्धनपुर से बीएचयू होते हुए बाबतपुर एयरपोर्ट जा रहे थे। इसी दौरान बीएचयू के मुख्य द्वार (सिंह द्वार) के पास लंका-नरिया मार्ग मोड़ पर कांग्रेसियों के बीच में खड़े कुछ युवक दौड़ते हुए उनके वाहन के समीप पहुंच कर उन्हें फूल-माला थमाते नजर आए। हालांकि राहुल ने उनकी हौसला अफजाई भी की।

राहुल गांधी तो उन युवाओं की हौसला अफजाई कर आगे निकल गए पर लंका क्षेत्र में तैनात पुलिसकर्मी उन युवकों को नियंत्रित करने में पूरी तरह से असफल दिखी। बल्कि जो थे वो मूकदर्शक बने रहे। राहुल गांधी का काफिला गुजर जाने के बाद पुलिस का कहना था कि वह कांग्रेस के ही कार्यकर्ता थे। बता दें कि हाल ही में लुधियाना में हुई सुरक्षा में चूक के चलते राहुल गांधी के वाहन पर झंडा फेंका गया था जो उनके चेहरे पर भी लगा था। इसे दिल्ली की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने गंभीरता से लिया था। सुरक्षा के स्तर पर इसे लोकल पुलिस और इंटेलिजेंस की चूक माना गया था।

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यहां ये भी बता दें कि केंद्र सरकार ने 2019 में गांधी परिवार की सुरक्षा से स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) को हटाया था। उसकी जगह गांधी परिवार को जेड प्लस सिक्योरिटी दी गई है। इसके तहत सीआरपीएफ के विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कमांडो गांधी परिवार की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहते हैं। इस क्रम में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की सुरक्षा में सीआरपीएफ के कमांडो का घेरा रहता है।

बुधवार को लंका क्षेत्र में फूल-माला सहित युवकों के राहुल गांधी के पास तक पहुंचने के सवाल पर वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था के जानकारों कहना है कि सड़क पर मूवमेंट के दौरान वीआईपी की सिक्योरिटी का ध्यान तो स्थानीय पुलिस को ही रखना पड़ता है। क्या पता कि उस फूल-माला में कोई विस्फोटक सामग्री ही हो। प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन होना चाहिए। खासतौर से चुनावी मौसम में वीआईपी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए। पुलिस को पूरी तरह से अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। कोई भी भले ही वीआईवी का कितना भी करीबी क्यों न हो, लेकिन हमें सुरक्षा मानकों का हर हाल में गंभीरता से पालन करना चाहिए।

सुरक्षा में चूक को लेकर वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है। अनौपचारिक रूप से कहा कि, कार्यकर्ता तो कांग्रेस के ही थे। देखा जा रहा है, किससे, कहां और कैसी चूक हुई है। उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।