
Swami Avimukteshwarananda
वाराणसी: बाल यौन शोषण के आरोपों से घिरे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में आशुतोष महाराज की प्रेस वार्ता के बाद काशी में पत्रकारों से बात की है। उन्होंने आशुतोष महाराज द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि एक पत्रकार नें खुलासा किया है कि एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है जो आशुतोष महाराज ने बनाया है। उस ग्रुप में इस मुकदमे से सम्बंधित सभी जानकारियां साझा की जा रही हैं।
आशुतोष महाराज व्हाट्सएप ग्रुप में विवेचना की जानकारी शेयर कर रहे: शंकराचार्य
शंकराचार्य नें आरोप लगाया कि इस ग्रुप में हमारे खिलाफ शब्द लिखे गए हैं। जिस तरह से विवेचना चल रही है उसे व्हाट्सएप ग्रुप में पॉइंट वाइज लिखा गया है, यानी कि पुलिस जो भी जांच कर रही है वह आशुतोष महाराज तक पहुंच रही है। मुझे उस व्हाट्सएप ग्रुप में मुझे फर्जी शंकराचार्य बताया गया है।
शंकराचार्य ने दिखाया व्हाट्सएप ग्रुप का स्क्रीनशॉट
शंकराचार्य ने आरोप लगाया है कि पत्रकार नें यह भी बताया है कि व्हाट्सएप ग्रुप में विवेचना कहां तक पहुंची है उसके बारे में भी जानकारी डी जा रही है। उन्होंने व्हाट्सएप का एक स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कहा कि इसमें लिखा है कि विवेचना के दौरान सभी साक्ष्य संकलन में आशुतोष महाराज नें सहयोग दिया और 3 दिन तक विवेचना टीम के साथ थे। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि आशुतोष महाराज की विवेचना के दौरान पुलिस के साथ रह रहे हैं और खुद को निर्दोष साबित करने की जुगत में लगे हैं।
किस जांच में शिकायतकर्ता पुलिस के साथ रहता है: शंकराचार्य
शंकराचार्य ने सवाल उठाया कि ऐसी कौन सी जांच होती है, जिसमें शिकायतकर्ता पुलिस के साथ रहता है। प्रयागराज के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर अजय पाल शर्मा के फोटो के आई निर्मित होने के दावे पर शंकराचार्य ने कहा कि इसी व्हाट्सएप ग्रुप में वह चित्र पड़ा हुआ है और नीचे जन्मदिन की बधाई लिखा हुआ है। यह वही फोटो है जो हमने मीडिया के सामने दिखाया है। इस चित्र को उन्होंने ही जारी किया था। यह चित्र फेसबुक पर भी अपलोड किया गया था, लेकिन बाद में उसे डिलीट कर दिया गया।
दोनों बच्चे आशुतोष महाराज के सांगिर्द: शंकराचार्य
शंकराचार्य ने कहा है कि इस बात की पुष्टि हमारे अधिवक्ताओं ने कर दी है कि वह दोनों बच्चे को उन्हीं के साथ लंबे समय से रह रहे हैं और उनके सांगिर्द के रूप में काम कर रहे थे। इसके कागजी प्रमाण भी हमारे पास है, लेकिन एक बच्चा माइनर है, इसलिए हम उसे सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं। सारे तथ्य सबूत के साथ संकलित हो गए हैं। दोनों ही बच्चे अलग-अलग स्थान पर जाकर कर्मकांड और धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं और क्यूआर कोड के माध्यम से दक्षिणा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे पास में वे बच्चे कभी आए ही नहीं। वे बच्चे आप ही के पास हैं, तो हमारे ऊपर जो आरोप लगाया जा रहे हैं वह पूरी तरह से झूठ हैं। हम न्यायालय में सारे प्रमाण रखने वाले हैं।
आशुतोष महाराज ने बदनाम करने की कोशिश की: शंकराचार्य
मठ के सीईओ प्रकाश उपाध्याय के बच्चों को मठ में ले आने के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि मुझे इस बात का दुख है कि जो लोग समर्पण के साथ मठ कि सेवा कर रहे हैं उनका नाम इसमें घसीटा जा रहा है। हमारे कर्मचारी और शिष्य मुकुंदानंद का नाम घसीटा जा रहा है। मुकुंदानंद हमारे विद्यालय के छात्र थे और उन्हें यह विद्यालय इतना अच्छा लगा कि वह यहीं पर रहकर धर्म कार्य करने लगे। हमारे विद्यालय में अच्छे घराने के बच्चे शिक्षा लेने आते हैं। आशुतोष महाराज ने उनका नाम बदनाम करने की कोशिश की है, ऐसा नहीं किया जाना चाहिए था।
बच्चे हमारे साथ कभी रहे ही नहीं: शंकराचार्य
जिस तरह से आशुतोष महाराज ने हमारे ऊपर मुकदमा करवाया है और फर्जी मुकदमा करवाया है, जैसे ही वह झूठा होगा उनके ऊपर मुकदमा किया जाएगा। यदि बच्चे के साथ गलत कृत्य हुआ है और वह बच्चे हमारे तक पहुंचे ही नहीं, हमारे यहां रहे ही नहीं है, तो स्वाभाविक बात है कि यह आशुतोष महाराज नहीं किया होगा। आशुतोष महाराज को बताना चाहिए कि उन बच्चों का हमसे संपर्क कब हुआ। जब काल्पनिक कहानी ही बनानी है तो कुछ भी किया जा सकता है। मेडिकल रिपोर्ट में क्या है वह संतोष महाराज को जानकारी है, मीडिया को जानकारी नहीं है। पुलिस के साथ मिलकर आशुतोष महाराज जांच करवा रहे हैं, उसकी जानकारी उनको कैसे मिल रही है।
शंकराचार्य ने कहा कि हाईकोर्ट में केस फाइल हो गई है उसकी कभी भी सुनवाई हो सकती है। इसके साथ शाहजहांपुर जिस व्यक्ति को प्रलोभन दिया गया था, हमने उनसे बात की है कि इस चीज को लेकर पुलिस कंप्लेंट क्यों नहीं कर रहे हैं। उस व्यक्ति नें कहा कि हम पुलिस में इसलिए नहीं जा रहे हैं कि पुलिस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करेगी। हम पहले भी मारपीट के मामले में पुलिस के पास जाने की कोशिश की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
मठ में स्विमिंग पूल होने के सवाल पर दिया जवाब
शंकराचार्य ने कहा कि अगर गुरु सही है तो शिष्य गलत नहीं हो सकता। उन्होंने मठ में स्विमिंग पुल के सवाल पर कहा कि मेरे मठ में किसी तरह का रहस्य नहीं है। यह सभी के लिए खुला हुआ है और काफी छोटा है। इसमें हम 150-200 लोग रहते हैं और कैसे रहते हैं वह हम ही जानते हैं। ऐसा कोई भी स्थान नहीं है, कोई शीश महल नहीं है और ना ही स्विमिंग पूल है। दिवंगत शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती यहां रहते थे और वह बीमार हो गए थे और चल नहीं पाते थे। डॉक्टर नें उन्हें पानी में खड़ा होगा चलने के लिए सलाह दी थी। उनके लिए एक छोटा सा कुंड का निर्माण किया गया था, लेकिन यह सिर्फ उसी समय के लिए था, उसके बाद उसका कोई उपयोग नहीं हुआ।
शंकराचार्य ने अपने परिवार को आर्थिक लाभ देने के सवाल पर कहा कि हम सन्यासी हैं और हम अपने परिवार को त्याग चुके हैं। इस वजह से हमारे परिवार वाले भी हमसे दुखी रहते हैं। हमने अपने परिवार के किसी तरह का कोई लाभ नहीं दिया है।
सीएम योगी पर उठाए सवाल
शंकराचार्य ने कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो नंबर हो गए हैं। सोचने वाली बात यह है कि कोई हिस्ट्रीशीटर एक रात में कैसे संत बन जाता है, जिसने गेरुआ वस्त्र धारण किया है, उससे इस तरह कि अपेक्षा नहीं की जा सकती। धर्म के पथ पर चलने वाला जो भी व्यक्ति इस तरह के कार्य करेगा, शंकराचार्य तो उसे पर उंगली जरूर उठाएगा। देश के साधु संत डरे हुए हैं कि जब शंकराचार्य के ऊपर एक हिस्ट्रीशीटर आरोप लगा सकता है और उसे पुलिस और राज्य सरकार से उसे संरक्षण मिल सकता है, तो हम बोलेंगे तो हमारे पीछे पुलिस पड़ जाएगी, तो हमें कौन बचाएगा।
Published on:
25 Feb 2026 05:40 pm
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