
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने खोले कई ‘राज’
Avimukteshwarananda Sexual Abuse Case Update: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने ऊपर लगाए जा रहे सभी आरोपों को पूरी तरह झूठा और निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है। बृहस्पतिवार को वह केदार घाट स्थित मठ में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई और कहा कि उन्हें अपनी हत्या की आशंका है।
अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि वह खुद इसके पक्ष में नहीं थे। उनका मानना था कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है, इसलिए जमानत की जरूरत नहीं होनी चाहिए। लेकिन आश्रम और पीठ से जुड़े लोगों को डर है कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। उन्होंने कहा कि आश्रम के लोगों को आशंका है कि अगर उन्हें जेल ले जाया गया, तो वहां उन्हें जहर की सुई देकर मारने की साजिश भी हो सकती है। इसी डर को देखते हुए अग्रिम जमानत का फैसला लिया गया।
शंकराचार्य ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप झूठे और गढ़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति झूठी कहानी बनाकर लोगों के सामने रख देता है और उसी आधार पर पूरा मामला आगे बढ़ा दिया जाता है। उनका कहना है कि बिना सच्चाई जांचे ही उनके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जांच टीम अपना काम कर रही है, लेकिन आशुतोष ब्रह्मचारी नाम का व्यक्ति प्रेस वार्ता करके जांच से जुड़ी बातें मीडिया में बता रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जांच टीम की रिपोर्ट एक हिस्ट्रीशीटर सार्वजनिक कर रहा है, तो पुलिस क्या कर रही है। उनके अनुसार यह कानून के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि पॉक्सो एक्ट से जुड़ी रिपोर्ट सामान्यतः सार्वजनिक नहीं की जाती। अगर कोई जानकारी दी भी जाती है तो वह पुलिस विभाग की ओर से होनी चाहिए। लेकिन यहां ऐसा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने शिकायतकर्ता को ही अपना प्रवक्ता बना दिया है।
मठ से जुड़े ‘शीश महल’ जैसे आरोपों पर उन्होंने कहा कि इस समय जिसे जो कहना है, वह कह रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी कमरे में शीशा लगा होना कोई बुराई नहीं है। अगर कमरा पारदर्शी है तो बाहर से अंदर देखा जा सकता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है। पांच मंजिला भवन के बारे में उन्होंने कहा कि यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे छिपाया जा सके। यह खुला और साफ दिखाई देने वाला ढांचा है। आश्रम में कुछ भी गुप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति आश्रम को ऊपर तक देखना चाहता है तो उसे बिना कैमरे के पूरा परिसर देखने की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि, वहां छात्र पढ़ते और रहते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कैमरे के साथ प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
शंकराचार्य ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से यह दिख रहा है कि देश के कानून, न्यायपालिका और सरकारों का दुरुपयोग कैसे हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एपस्टीन फाइल में देश के कई बड़े लोगों के नाम शामिल हैं। उनका कहना है कि इन नामों को दबाने के लिए ही उनकी छवि खराब की जा रही है और जनता का ध्यान भटकाया जा रहा है।
Published on:
27 Feb 2026 07:50 am
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