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ज्ञानवापी प्रकरण में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद का संदेश, मस्जिद में मिली शिवलिंगनुमा आकृति की नियमित पूजा हो, शनिवार को होगी पूजा

ज्ञानवापी प्रकरण में पहली बार ज्योतिष एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का संदेश सामने आया है। इसे शंकराचार्य के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गुरुवार को मीडिया के सामने रखा। उन्होंने बताया कि शंकराचार्य ने किसी देव विग्रह के प्राक्ट्य पर उसकी नियमित पूजा का संदेश दिया है। इसके तहत शनिवार को अविमुक्तेश्वरानंद करेंगे पूजन।

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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद

वाराणसी. ज्ञानवापी प्रकरण में पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती के बाद ज्योतिष एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का संदेश सामने आया है। इस संदेश को शंकराचार्य के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से गुरुवार को मीडिया के सामने रखा। उन्होंने बताया कि इस संदर्भ में जब मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य लाभ कर रहे अनंत श्री विभूषित उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं पश्चिमाम्नाय द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज को बताया गया तो उन्होंने तत्काल अपने शिष्य स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती को आदेश दिया कि जाओ और आदि विश्वेश्वर भगवान् की पूजा शुरू करो।

प्रकट प्रभु की पूजा में विलम्ब अनुचित

बताया कि प्रभु के प्रकट होते ही उनकी स्तुति पूजा, राग-भोग होना चाहिए था । परम्परा को जानने वाले सनातनियों ने तत्काल स्तुति पूजा के लिए न्यायालय से अनुमति मांगी जिनमें शृंगार गौरी और आदि विश्वेश्वर संबंदित मुक़दमों के अनेक पक्षकारों सहित शंकराचार्य की शिष्याए अविरल गंगा तपस्विनी साध्वी पूर्णाम्बा और शारदाम्बा तथा काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत परिवार के सदस्य भी थे। पर दुर्भाग्यवश न्यायालय ने इस मामले की गम्भीरता और एक आस्तिक हिंदू के नज़रिये को नहीं समझा और आवेदनों की सुनवाई के लिए तारीख़ पर तारीख़ देते हुये अब 4 जुलाई की तारीख़ लगा दी है,जबकि पूजा और रागभोग एक दिन भी रोका नहीं जाना चाहिए।

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भारतीय संविधान के अनुसार भी देवता 3 वर्ष के बालक

कहा कि शास्त्रों में बताया गया है कि देवता को एक दिन भी बिना पूजा के नहीं रहने देना चाहिए। तदनुसार भारत के संविधान में भी यह स्पष्ट रूप से उल्लिखित है कि कोई भी प्राण प्रतिष्ठित देवता 3 वर्ष के बालक के समकक्ष होते हैं। जिस प्रकार 3 वर्ष के बालक को बिना स्नान भोजन आदि के अकेले नहीं छोडा जा सकता उसी प्रकार देवता को भी राग भोग आदि उपचार पाने का संवैधानिक अधिकार है। इसी कारण किसी भी मंदिर की सम्पत्ति देवता के नाम पर होती है लेकिन उनकी सेवा के लिए सेवईत पुजारी आदि अनिवार्य रूप से नियुक्त होते हैं जो देवता की सेवा करते हैं। भगवान आदि विश्वेश्वर अब प्रकट हुए हैं अतः उन्हें राग भोग से वंचित करना संविधान के भी विपरीत है।

शंकराचार्य का आदेश, पूजा होती रहे

बताया कि इस संदर्भ में जब मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य लाभ कर रहे अनन्त श्री विभूषित उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं पश्चिमाम्नाय द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज को बताया गया तो उन्होंने तत्काल अपने शिष्य स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती को आदेश दिया कि जाओ और आदि विश्वेश्वर भगवान् की पूजा शुरू करो।

शंकराचार्य का आदेश धर्म क्षेत्र में सर्वोपरि
भगवत्पाद आद्य शंकराचार्य द्वारा रचित मठाम्नाय महानुशासनम् के अनुसार उत्तर भारत का क्षेत्र ज्योतिष्पीठ का कहा गया है और इस समय ज्योतिष्पीठ पर हमारे पूज्य गुरुदेव स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज विराजमान हैं। ज्ञानवापी काशी में होने से इस क्षेत्र का धार्मिक उत्तरदायित्व पूज्यपाद ज्योतिष्पीठाधीश्वर के अन्तर्गत आता है। धर्म के क्षेत्र में शंकराचार्य का ही निर्णय सर्वोपरि होता है। अतः उनके आदेश का पालन समस्त हम सभी सनातनियों को करना चाहिए।

शनिवार को करेंगे आदि विश्वेश्वर का पूजन

बताया कि हमारे शास्त्रों में स्थाप्यं समाप्यं शनि- भौमवारे कहकर शनिवार को शुभ दिन कहा गया है। प्रकट हुए स्वयम्भू आदि विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान् के पूजन के लिए शनिवार का दिन अत्यन्त उत्तम है। अतः इस दिन शुभ मुहूर्त में हम स्वयं पूजा पद्धति को जानने वाले विद्वानों एवं पूजा सामग्री के साथ भगवान् आदि विश्वेश्वर के पूजन के लिए जाएंगे।

शिवलिंग को फव्वारा बताकर मुसलमान भी प्रकारांतर से कर रहे हिंदुओं का समर्थन

शास्त्रों में भगवान् शिव के अतिरिक्त अन्य ऐसे कोई देवता नही है जिनके शिर से जलधारा निकलती हो। जो मनुष्य सनातन संस्कृति को न जानते, भगवान् शिव के स्वरूप एवं उनके माहात्म्य को नहीं जानते वे किसी के शिर से पानी निकलते हुए देखकर उन्हें फव्वारा ही तो कहेंगे। मुसलमान लोग भगवान् शिव को नहीं जानते और न ही उनको मानते हैं। इस्लाम में देवता आदि की परिकल्पना दूर दूर तक नही है। ऐसे में वे सभी अबोध हमारे भगवान् शिव को फव्वारा नाम से कहकर स्वयं यह सिद्ध कर दे रहे हैं कि वे ही भगवान् शिव हैं। हमने इण्टरनेट पर मुग़लों की बनवाई इमारतों के अनेक फ़व्वारों को देखा पर एक भी शिवलिंग की डिज़ाइन का नहीं मिला। तब बड़ा प्रश्न उठता है कि आख़िर क्या कारण हो सकता है काशी में शिवलिंग के आकार का फ़व्वारा बनाने के पीछे? मानना होगा कि मुसलमानों के ज़ेहन में भी शिवलिंग के आकार का फ़व्वारा बनाने की बात नहीं आ सकती ।

केंद्र सरकार 1991 के काला कानून को समाप्त करे

उन्होंने कहा कि इस समय केंद्र की सरकार बहुमत में है। उनको चाहिए कि वे उपासना स्थल अधिनियम 1991 को तत्काल समाप्त करें ताकि हिंदू पुनः अपने स्थान को ससम्मान प्राप्त कर सकें और न्याय हो।