
शरद पूर्णिमा की रात गाय के दूध से बनी खीर का सेवन करने से इन रोगों से मिलता है स्वास्थ लाभ, इस विधि से बनाएं खीर
वाराणसी. यू तो वर्षभर में कुल 12 पूर्णिमा होती हैं। लेकिन इन सभी में शरद पूर्णिमा का खास महत्व है। ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार चंद्रमा वर्ष में एक बार शरद पूर्णिमा की रात्रि षोडश कलाओं से युक्त होता है। आयुर्वेद शास्त्र ने नक्षत्राधिपति चंद्रमा को औषधियों का स्वामी माना जाता है। इस रात चंद्र की किरणों में औषधीय अमृत गुण आ जाता है। और उसकी किरणों से धरती पर अमृत वर्षा होती है। इस रात्रि गाय के दूध से बनी खीर बनाकर प्रभु को अर्पित करने के बाद, चंद्रोदय के समय खुले आसमान के नीचे खीर रख देनी चाहिए। अगली सुबह प्रसाद स्वरूप खीर का सेवन करने से स्वास्थ लाभ मिलता है। तमाम तरह के विकारों से मुक्ति मिलती है। खीर के सेवन से उर्जा मिलती है।
शरद पूर्णिमा की खीर खाने से इस तरह के रोग से मिलती है मक्ति
शरद पूर्णिमा की रात, चन्द्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है। साथ ही वह इस रात्रि षोडश कलाओं से युक्त होता है। और इस रात्रि चन्द्रमा का ओज सबसे तेजवान एवं ऊर्जावान होता है, इसके साथ ही शीत ऋतु का प्रारंभ होता है। शीत ऋतु में जठराग्नि तेज हो जाती है और मानव शरीर स्वास्थ्य से परिपूर्ण होता है। वहीं इस रात गाय का दूध और चावल मिश्रित खीर पर चन्द्रमा की किरणों को गिरने के लिए रख देते हैं। चन्द्रमा तत्व व दूध पदार्थ समान ऊर्जा धर्म होने के कारण दूध अपने में चन्द्रमा की किरणों को अवशोषित कर लेता है। इस खीर का सेवन करने से अस्थमा, चर्म रोग, आंखों से जुड़ी बीमारियों के मरीजों के लिए बेहद लाभ मिलता है।
इस तरह बनाएं शरद पूर्णिमा की खीर
शरद पूर्णिमा की खीर बनाने के लिए एक मोटे तले वाले बर्तन में गाय का दूध डालें और तब तक पकाए जब तक यह एक चौथाई न हो जाए। इसके बाद इसमें दूध की मात्रा अनुसार चावल डालें। और चावल पकने तक करछी से चलाते रहें। चावल पकने के बाद आवश्यकता अनुसार मिश्री या चीनी डालें। कुछ देर बाद खीर में इलाइची पाउडर और मेवे आदि डालें। और फिर खीर को 5 मिनट तक पकने के बाद गैस बंद कर दें।
Published on:
23 Oct 2018 03:58 pm
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