
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की कब्र पर हुई दुआख्वानी
वाराणसी. दुनिया भर में अपनी शहनाई की सुरीली व मधुर धुन के लिए मशहूर भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की बरसी (पुण्यतिथि) रविवार 21 अगस्त को मनाई गई। इसके तहत दरगाह- ए- फातमान में उनकी कब्र पर खिराज ए अकीदत पेश किया गया। इस मौके पर उनके परिवारजनों के अलावा उनके शुभचिंतक भी जुटे और उनकी कब्र पर खिराज-ए-अकीदत पेश किया। उनकी कब्र पर शहनाई की धुन भी गूंजी।
उस्ताद की कब्र पर हुई दुआख्वानी
इस मौके पर उस्ताद की कब्र पर सामूहिक दुआख्वानी कर मुल्क के अमनो-अमान की दुआएं मांगी गईं। लोगों ने मकबरे पर पुष्प अर्पित किए। इस अवसर पर शकील अहमद जादूगर ने कहा कि इस मुहर्रम के महीने में उस्ताद बिस्मिल्लाह खां यहां भी शहनाई बजाया करते थे। उन्होंने सरकार से दरख्वास्त की कि कि बिस्मिल्लाह खां के मकान को भव्य संग्रहालय में तब्दील किया जाए। साथ ही उन्होंने बनारस के सांसद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उस्ताद के परिवारजनों की आर्थिक मदद की गुजारिश भी की।
उस्ताद आजीवन काशीवासी रहे
शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता फरमान हैदर का कहना है कि खां साहब ने 6 साल की उम्र से बनारस में रियाज करना शुरू किया था। उन्होंने गंगा किनारे बालाजी घाट स्थित मंदिर के प्रस्तर सोपानों पर बैठ कर 40 साल तक शहनाई का रियाज किया। उस्ताद ने ज्यादातर गंगा किनारे ही अपना वक्त गुजारा। वो दुनिया के किसी भी कोने में रहे, लेकिन गंगा और काशी उनके दिल में बसती थी। उसके बगैर उनका कहीं मन नही लगता था। उन्हें सुकून तो काशी में ही मिलता था। उस्ताद को कई मौके मिले पर अंतिम सांस तक वह काशीवासी ही बने रहे। उस्ताद गंगा किनारे ही नहीं मामू 'विलायती' के साथ श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में भी शहनाई बजाया करते थे।
ये रहे मौजूद
उस्ताद की पुण्यतिथि के मौके पर सैयद फरमान हैदर, फिरोज हुसैन, आफाक हैदर, फतेह अली खां, हादी हसन आदि मौजूद रहे।
Published on:
21 Aug 2022 04:15 pm
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