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Ghosi By Election Result 2023: घोसी में सुधाकर सिंह ने दौड़ा दी साइकिल, जानें BJP की हार के 10 बड़े फैक्टर

Ghosi By Election Result 2023: उत्तर प्रदेश की घोसी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं। इसमें सपा प्रत्याशी सुधाकर स‌िंह ने भाजपा के दारा सिंह चौहान को लगभग 42759 वोटों से पटखनी दी है। आइए बताते हैं भाजपा की हार के 10 फैक्टर...  

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SP leader Sudhakar Singh won Ghosi by-election 2023 know 10 big reasons for BJP defeat

घोसी उपचुनाव में सपा प्रत्याशी ने दर्ज की जीत।

Ghosi By Election Result 2023: उत्तर प्रदेश की घोसी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं। इसमें सपा प्रत्याशी सुधाकर स‌िंह को लगभग 124427 वोट मिले हैं। जबकि भाजपा के दारा सिंह चौहान को लगभग 81668 वोटों के साथ हार का सामना करना पड़ा। यानी सपा के सुधाकर सिंह ने भाजपा के दारा सिंह को लगभग 42759 वोटों से पटखनी दी है। इस चुनाव को 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा की साख से जोड़कर देखा जा रहा था। हालांकि यहां भाजपा अपनी साख बचाने में फेल हो गई है। इतना ही नहीं, भाजपा प्रत्याशी दारा स‌िंह चौहान का गढ़ माने जाने वाले नटवा सराय, कोइरिया पार, सराय साधी के अलावा करीब 10 गांवों में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। यह गांव चौहान-राजभर की बेल्ट माने जाते हैं। इस हार का असली कारण जानने के लिए आपको साल 2022 में ले चलते हैं।

10 फैक्टर से पहले आपके लिए ये जानना जरूरी
दरअसल, इसकी कहानी शुरू होती है साल 2022 से। जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दारा सिंह चौहान भाजपा छोड़ सपा में शामिल हुए। इसके बाद सपा के टिकट पर दारा सिंह ने घोसी विधानसभा सीट से चुनाव जीत लिया। उस चुनाव में दारा सिंह चौहान को 108430 वोट मिले थे।

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जबकि भाजपा से विजय कुमार राजभर को 86214 वोट मिले थे। दारा सिंह को पोस्टल बैलेट से 1083 वोट मिले थे। जबकि विजय कुमार राजभर को 320 वोट मिले थे। यहां 1249 लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया था। इसके ठीक 15 महीने बाद यानी जुलाई 2023 में दारा स‌िंह चौहान ने सपा से इस्तीफा देकर फिर भाजपा का दामन थाम लिया। इसके चलते यहां की सीट खाली हो गई।

अब जानते हैं उपचुनाव में भाजपा को हराने वाले 10 फैक्टर
10. कांग्रेस से सपा, सपा से बसपा, बसपा से भाजपा, भाजपा से दूसरी बार सपा और अब एक बार फिर भाजपा में वापस लौटने के बाद भाजपा प्रत्याशी दारा सिंह चौहान पर दल-बदल की राजनीति का आरोप लगा। यह घोसी से उनकी विधानसभा उप-चुनाव में उम्मीदवारी के लिए सबसे बड़ा खतरा बना।

09. दारा सिंह चौहान को यूपी में सत्ता के सियासी मौसम का सटीक जानकार माना जाता रहा है। उन्होंने चुनाव दर चुनाव सत्ता का रुख देखते हुए पाला बदला और सरकारों में शामिल रहे। जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी सपा प्रत्याशी सुधाकर सिंह शुरू से ही सपा में हैं। इसके अलावा स्‍थानीय बनाम बाहरी फैक्टर को सपा ने भुना लिया।

08. दारा सिंह चौहान मधुबन से साल 2017 में विधानसभा चुनाव जीते और पहली बार सीएम योगी की कैबिनेट में वन एवं पर्यावरण मंत्री बनाए गए। करीब पांच साल सत्ता सुख भोगने के बाद दारा सिंह चौहान ने भाजपा पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया और समाजवादी पार्टी के टिकट पर घोसी से जीत हासिल भी की, लेकिन सरकार भाजपा की बनी। इसलिए सपा की नीतियों को खराब बताकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इससे जनता में संदेश गलत चला गया।

07. दारा सिंह चौहान का जन्म 25 जुलाई 1963 को आजमगढ़ जिले के गलवारा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम राम किशन चौहान है। दारा सिंह चौहान ने दिशा चौहान से शादी की थी, उनकी दो बेटियां और दो बेटे हैं। जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी सुधाकर सिंह घोसी के मूल निवासी हैं। इससे घोसी की जनता ने उन्हें नकार दिया।

06. सपा के प्रत्याशी सुधाकर सिंह और दारा सिंह चौहान, दोनों का राजनीतिक करियर लगभग 40- 40 साल पुराना है। फ़र्क़ सिर्फ़ इतना ही है कि दारा सिंह चौहान ने मौके देख कर बार-बार पार्टी बदली और सपा के सुधाकर सिंह हमेशा पार्टी के प्रति वफ़ादार रहे। ये फैक्टर भी उन्हें हराने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।

05. राजनीति के जानकार बताते हैं कि जो जनता हमेशा भाजपा के लिए वोट करती आई है, वह कभी दलगत राजनीति का हिस्सा नहीं रही। सपा में जाने के कारण भाजपा का वोटर दारा सिंह से पहले ही नाराज था। बाद में फिर भाजपा जॉइन कर उपचुनाव में प्रत्याशी बनने से यह गुस्सा बढ़ गया। यह हार का बड़ा फैक्टर बना।

04. जो लोग योगी-योगी, मोदी-मोदी करते रहे हैं वो लोग खुलकर सोशल मीडिया पर दारा सिंह चौहान का विरोध भी करने लगे। इससे जनता में गलत संदेश चला गया। इसका परिणाम यह रहा कि जो भाजपा के वोटर थे, उन्होंने पाला बदल लिया। जबकि सपा के वोटर सपा के साथ ही रहे।

03. घोसी विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता करीब 1 लाख (सबसे ज़्यादा अंसारी बुनकर) , लगभग 90 हज़ार से अधिक दलित मतदाता, 50 हज़ार राजभर (जिसमें नुनिया (कुर्मी) भी शामिल हैं)। 50 हज़ार चौहान (पिछड़े) जो दारा सिंह चौहन की बिरादरी के हैं। 20 हज़ार निषाद, 15 हज़ार ठाकुर, 15 हज़ार भूमिहार, 8 हज़ार ब्राह्मण और 30 हज़ार वैश्य वोटर हैं। इनमें से ज्यादातर लोगों की नाराजगी दारा सिंह दूर नहीं कर पाए।

02. सुभासपा नेता ओम प्रकाश राजभर के भाजपा में शामिल होने के बाद माना जा रहा था कि ये राजभर वोटर भाजपा के पाले में ले आएंगे। लेकिन इनके भी बार-बार दल बदलने से इनका वोटर नाराज था। जिसका सपा ने फायदा उठा लिया।

01. सपा छोड़ जब दारा सिंह चौहान भाजपा में शामिल होने के बाद घोसी पहुंचे तो एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्हें पत्रकारों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। पूछा गया कि क्या अब वो भाजपा में ही रहेंगे और फिर कोई दल बदल नहीं करेंगे, क्या उन्हें घुटन महसूस नहीं होगी? इस प्रेस कांफ्रेंस का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें दारा सिंह चौहान अपनी सफ़ाई में सिर्फ़ इतना कह पाए कि, "यह सब गारंटी तुम क्यों लेते हो। मैं पार्टी में हूं, और मैं जब तक हूं पार्टी में ही रहूंगा। हमारी पार्टी बहुत बड़ी है। मोदी सरकार में कोई भेदभाव नहीं है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में केंद्र की योजनाएं दरवाज़े-दरवाज़े पर पहुंच रही हैं।"

उनसे पूछा गया कि एक साल पहले जब दारा सिंह योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री थे तो "क्या लोगों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा था?" दारा सिंह चौहान ने जवाब दिया "तब भी मिल रहा था, अब भी मिल रहा है। घोसी की जनता नाराज नहीं है और सभी कार्यकर्ता खुश हैं। पूरी पार्टी के लोग खुश हैं. आम जनता खुश है।" दारा सिंह की ये बातें जनता में सही संदेश नहीं पहुंचा पाईं।