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भैरव अष्टमी पर भैरव के बाल रूप का करें ध्यान, इस मंत्र के जप से सभी बाधाएं होंगी दूर

कमच्छा के बटुक भैरव मंदिर में होगा दो दिवसीय विशेष आयोजन, 601 किलो का केक भी काटा जाएगा

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बाबा बटुक भैरव

बाबा बटुक नाथ

वाराणसी. भैरव अष्टमी पर शहर के विभिन्न भैरव मंदिरों में विशेष आयोजन होने जा रहे हैं। भैरव जयंती अगहन मास की अष्टमी तिथि को मनायी जाती है। इस वर्ष यह जयंती दिनांक 29-30 नवंबर 2018 को है। इस अष्टमी को तंत्र के देवता भैरव की विधिवत उपासना की जाती है। इसी कड़ी में कमच्छा स्थित भैरव के बाल स्वरूप यानी बटुक भैरव मंदिर में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है। यह आयोजन गुरुवार की रात यानी 29 नवंबर की रात से ही शुरू हो जाएगा। अगले दिन 30 नवंबर को सुबह से देर रात तक पूजन-अर्चन, श्रृंगार का आयोजन होगा।

मंदिर के महंत भास्कर पुरी के अनुसार भैरव अष्टमी महोत्वस के तहत बटुक भैरव मंदिर में दो दिवसीय आयोजन होंगे जिसकी शुरूआत गुरुवार रात से शुरू हो जाएगी। इसके तहत रात 08 बजे महा आरती होगी। फिर अगले दिन 30 नवंबर को तड़के पांच बजे मंगला आरती होगी, 11 बटुक रुद्राभिषेक करेंगे। फिर दिन के 10 बजे विशेष स्नान और श्रृंगार होगा। दोपहर 12 बजे 1008 बटुकों को भोजन कराया जाएगा। इसके साथ शुरू होगा भंडारा। शाम पांच बजे से बाबा बटुक भैरव का रुद्राक्ष श्रृंगार किया जाएगा। साथ ही लगेगा 56 भोग जिसकी झांकी सजाई जाएगी। रात आठ बजे घी के 1008 दीपों से महा आरती की जाएगी। रात 11 बजे बाबा का पंचोपकार पूजन शुरू होगा जो मध्य रात्रि तक चलेगा। बाबा के अन्नकूट और रुद्राक्ष श्रृंगार का प्रसाद एक दिसंबर को शाम चार बजे से वितरित किया जाएगा।


मान्यता है कि बाबा अपने भक्तों के कष्टों दूर कर बल, बुद्धि, तेज, यश, धन तथा मुक्ति प्रदान करते हैं। जो व्यक्ति भैरव जयंती को भैरव का व्रत रखता है, पूजन या उनकी उपासना करता है उसे समस्त दुःखों से मुक्ति मिल जाती है। श्री भैरव अपने उपासक की दसों दिशाओं से रक्षा करते हैं। बाबा को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का ध्यान करना चाहिए..,

''चमत्कारी भैरव मंत्र- 'ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं'।''


इन कार्यों से बाबा का मिलता है आशीर्वाद
-बाबा भैरव नाथ का वाहन श्वान यानी कुत्ता है लिहाजा कुत्ते को मिष्ठान खिलाकर दूध पिलाएं
-भैरव की पूजा में श्री बटुक भैरव अष्टोत्तर शत-नामावली का पाठ करें
-भैरव की प्रसन्नता के लिए श्री बटुक भैरव मूल मंत्र का पाठ करें
-भैरव को शिवजी का अंश अवतार माना गया है। रूद्राष्टाध्याय तथा भैरव तंत्र से इस तथ्य की पुष्टि होती है।
-भक्तों पर कृपावान और दुष्टों का संहार करने में सदैव तत्पर रहते हैं।

भैरव के इन 8 नामों के उच्चारण से मनोवांछित मनोकामना की पूर्ति होती है
1-अतिसांग भैरव
2-चंड भैरव
3-रुरु भैरव
4-क्रोध भैरव
5-उन्मत्त भैरव
6-कपाल भैरव
7-संहार भैरव
8-भीषण भैरव


इन कष्टों का होता है शमन
-शत्रु विनाश तथा अंतः मन के विकारों को दूर करने के लिए भैरव अष्टमी के दिन भैरव उपासना अवश्य करनी चाहिए।
-जन्मकुंडली के पंचम भाव में राहु बैठकर संतान प्राप्ति में बाधा उत्पन्न कर रहा है तो भैरो पूजा से राहु का दोष समाप्त होता है
-यदि कुंडली में गुरु के साथ राहु बैठा है तो गुरू चांडाल नामक नकारात्मक परिणाम देता है, ऐसी स्थिति में भैरो पूजा नितांत आवश्यक है।
-राजनीति में सफलता के लिए बंगलामुखी उपासना के साथ यदि भैरव पूजा भी तांत्रिक विधि से की जाय तो बहुत शीघ्र बड़ी सफलता मिलती है
- जो लोग बहुत भयभीत रहते हैं या जिनका आत्मबल कमजोर होता है उनको विधिवत भैरव पूजा करनी चाहिए ताकि उनका जीवन निर्भय हो सके