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काशी बनेगी मेडिकल टूरिज्म का हब, एलोपैथ से आयुर्वेद तक के मेडिकल कॉलेज होंगे स्थापित, हेल्थ सेक्टर को मिलेगी नई उड़ान

काशी में अब एलोपैथ से लेकर होम्योपैथी तक के मेडिकल कॉलेज स्थापित होंगे। इनमें से 6 राजकीय मेडिकल कॉलेज होंगे जो मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए वरदान साबित होने वाले हैं...

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वाराणसी: काशी अब धार्मिक पर्यटन के साथ ही मेडिकल टूरिज्म का भी हब बनने वाली है। यहां एक दो नहीं बल्कि 6 राजकीय मेडिकल कॉलेज स्थापित होंगे, जो पूर्वांचल के साथ ही बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और यहां तक की मध्य प्रदेश के लोगों और छात्रों के लिए वरदान साबित होंगे। दरअसल, काशी में हर पद्धति के मेडिकल कॉलेज संचालित किए जाएंगे और स्वास्थ्य व शिक्षा को लेकर यहां बेहतर सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी।

मेडिकल छात्रों के लिए वरदान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी अब मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में कदम आगे बढ़ा रहा है। यहां काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल के आईएमएस के अलावा हेरिटेज मेडिकल कॉलेज भी संचालित किया जा रहा है। इसके साथ ही ईएसआईसी अस्पताल में भी मेडिकल कॉलेज की सुविधा शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही राजकीय आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज भी संचालित किया जा रहा है। मेडिकल में रूचि रखने वाले छात्रों के लिए यह एक वरदान साबित होने वाला है।

तीन राजकीय मेडिकल कॉलेज के अलावा काशी में तीन और मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएंगे और प्राइवेट संस्थान के साथ अब कुल मिलाकर इनकी संख्या 7 हो जाएगी। वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि वाराणसी में पहले से ही मेडिकल की बेहतर सुविधाएं मौजूद हैं, जो पूर्वांचल और बिहार से आने वाले मरीजों को स्वास्थ्य लाभ देती हैं और यहां छात्र बेहतर तरीके से अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं।

राजकीय मेडिकल कॉलेज की संख्या 6 हो जाएगी

उन्होंने बताया कि क्योंकि छात्रों की रूचि मेडिकल के क्षेत्र में बढ़ी है, इसको लेकर शासन ने यहां मेडिकल कॉलेज की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि सर सुंदरलाल अस्पताल में आईएमएस में पहले से ही मेडिकल कॉलेज चल रहा है, जबकि प्राइवेट सेक्टर में हेरिटेज मेडिकल कॉलेज से से भी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस साल से ईएसआईसी अस्पताल का मेडिकल कॉलेज भी शुरू कर दिया गया है और यहां के पहले बैच की इसी साल से शुरुआत हो चुकी है।

जिलाधिकारी ने बताया कि पांडेपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय के परिसर को जोड़ते हुए राजकीय मेडिकल कॉलेज बनाया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले वर्ष से यह प्रारंभ हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त अब होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज का कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है और अगले दो वर्षों में उम्मीद है कि इसकी शुरुआत भी कर दी जाएगी।

जिलाधिकारी के मुताबिक, विश्व की सबसे प्राचीन और प्रलेखित पारंपरिक चिकित्सा सोवा-रिग्पा के लिए भी मेडिकल कॉलेज की स्थापना भी की गई है। इस मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूरा हो चुका है। इसके साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर भी पूरी तरीके से तैयार है। उन्होंने बताया कि हमें उम्मीद है कि अगले वर्ष से इसे भी संचालित किया जाएगा।

हर पद्धति का होगा कॉलेज

जिलाधिकारी ने बताया कि इस दौरान प्रदेश में आठ राजकीय आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें से एक वाराणसी में स्थापित है। उन्होंने बताया कि अब काशी जो है सिर्फ एलोपैथ तक ही सीमित नहीं रहेगी बल्कि यहां होम्योपैथिक, आयुर्वेद और सोवा-रिग्पा पद्धति से भी छात्रों को शिक्षा मिल पायेगी इसके साथ ही मरीजों के लिए भी यह वरदान साबित होने वाला है। उन्होंने बताया कि शायद काशी प्रदेश का एक मात्र ऐसा शहर होगा, जहां पर इन सभी पद्धतियों का एक मेडिकल कॉलेज स्थापित होगा। इन मेडिकल कॉलेज की सौगात से सिर्फ पूर्वांचल ही नहीं बल्कि आसपास के कई राज्यों के लोगों और छात्रों को भी सुविधा मिलेगी।