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Varanasi News : दुर्घटना में घायल हेनरिक्स को स्वप्न में दिखे श्रीकृष्ण…ईसाई धर्म छोड़ अपनाया सनातन धर्म

वाराणसी के एक सिद्ध मंदिर में ईसाई युवक ने विधि विधान से सनातन धर्म अपना लिया है। युवक का नाम हेनरिक्स है, उसने बताया कि वह शुरू से सनातन धर्म के प्रति आकर्षित रहा है, इसी बीच हुई सड़क दुर्घटना के बाद उसके जीवन की दिशा ही बदल गई।

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वाराणसी में एक ईसाई युवक ने सनातन धर्म अपनाया है, जिसका नाम हेनरिक्स बताया जा रहा है। हेनरिक्स ने मंदिर में जाकर विधि विधान से शुद्धिकरण कराकर सनातन धर्म में वापसी कराई. साथ ही नाम भी बदल लिया।

काशी में हेनरिक्स बने केशव

जानकारी के मुताबिक हेनरिक्स नामक एक व्यक्ति ने आधिकारिक रूप से सनातन धर्म अपनाया। ईसाई धर्म को छोड़कर हिंदू परंपराओं को अपनाने का निर्णय लिया। गुरुवार को वाराणसी में हेनरिक्स विधिवत केशव बन गए, सिद्धगिरीबाग स्थित ब्रह्म निवास मठ में मंत्रोंच्चार के बीच हेनरिक्स ईसाई मत को छोड़कर सनातन धर्म घर वापसी की।

सड़क दुर्घटना के बाद महसूस करने लगा बदलाव

हेनरिक्स ने बताया कि लिथुआनिया में एक सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद उन्हें स्वप्न में भगवान श्री कृष्ण के दर्शन हुए और वे इससे प्रभावित होकर गीता पढ़ने लगे. भारतीय अध्यात्म से प्रभावित होकर सनातन धर्म से जुड़ने की इच्छा लेकर वाराणसी आ गए।इसके बाद काशी में हेनरिक्स ने सनातन धर्म में दीक्षा ली। सनातन धर्म में वापसी के बाद हेनरिक्स का नाम केशव और उनका गोत्र कश्यप रखा गया। दीक्षा कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री अशोक तिवारी भी मौजूद रहे। भगवान कृष्ण से प्रभावित लिथुआनिया के नागरिक हेनरिक्स ने ईसाइयत छोड़कर सनातन धर्म स्वीकार कर लिया।

भारतीय संस्कृति के प्रति आकर्षित रहे हैं

बता दें कि यह कार्यक्रम काशी के एक प्रसिद्ध मंदिर में आयोजित किया गया, जहां हेनरिक्स ने मंत्रोच्चारण के बीच शपथ ली। उन्होंने अपने नए जीवन की शुरुआत करते हुए कहा, "मैंने अपने आत्मा की आवाज़ सुनी। हेनरिक्स का कहना है कि वह हमेशा से भारतीय संस्कृति और संस्कृतियों के प्रति आकर्षित रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन के कई वर्षों को विभिन्न धार्मिक विचारों को समझने में बिताया।इस कार्यक्रम में कई संत, पुजारी और स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित थे।संतों ने हेनरिक्स को आशीर्वाद दिया और उन्हें भारतीय संस्कृति के मूल तत्वों से अवगत कराया।इस अवसर पर आयोजित हवन और यज्ञ में हेनरिक्स ने भाग लिया, जो उनकी नई यात्रा का प्रतीक था।हेनरिक्स के इस कदम ने धार्मिक सहिष्णुता और विविधता के महत्व को भी उजागर किया है।