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Varanasi News : मदरसों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ रहे हैं ये शिक्षक, पर खुद भुखमरी के शिकार, जानिए क्यों ?

Varanasi News : राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की पैनल सदस्य हुमा बानों ने मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक को आश्वासन दिया है कि जल्द ही इसका समाधान किया जाएगा ताकि मदरसों में आधुनिक शिक्षा जारी रहे।

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Varanasi News : आधुनिक मदरसों में गणित, विज्ञान और अंगेजी पढ़ाने वाले अध्यापकों को 70 महीनों से अधिक समय से सैलेरी नहीं मिल रही है। उन्हें हर महीने सिर्फ 3 हजार रुपए दिए जा रहे हैं जबकि उन्हें 15 हजार सैलरी मिलनी चाहिए। इस मामले को लेकर कई बार धरना-प्रदर्शन और केंद्र और राज्य सरकार के जिम्मेदार मंत्रियों से मिल चुके शिक्षकों ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की पैनल सदस्य हुमा बानों संग बैठक कर उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया। हुमा बनों ने इस सम्बन्ध में प्रभावी पहल का आश्वासन दिया है।

मदरसा रिजविया रशीदुलउलूम में हुई बैठक

बजरडीहा स्थित मदरसा रिजविया राशीदुलउलूम में हुई इस बैठक में शिक्षक विनोद कुमार मौर्या ने बताया कि मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को मदरसे में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कंप्यूटर आदि विषय अलपसंखयक समुदाय के छात्रों को पढाने के लिए रखा गया। शिक्षकों की योग्यता भी बीए, एमए व बीएड है। ताकि मदरसे के छात्र शिक्षा की मुख्य धारा से जुड़ सकें और उनकी दशा सुधर सके। इस योजना से अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र लाभान्वित भी हो रहे हैं और उनका शिक्षा के असर में बहुत काफी सुधार भी हुआ है।

2017 से नहीं मिली सेलेरी

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पैनल की सदस्य हुमा बानों के संग बैठक कर इन शिक्षकों ने अपनी मांगे दोहराई और अपना बकाया वेतन मांगा। शिक्षकों ने बताया कि हमारा वेतन 2017 से नहीं दिया गया है। हम अब भुखमरी की कगार पर हैं। बताया कि अभी तक आश्वासन के अलावा और कुछ हासिल नहीं हुआ। भाजपा के घोषणा पत्र में मदरसों के आधुनिकीकरण का वादा किया गया था। 2019 में केंद्र में सरकार बनने पर ऐलान किया गया कि मदरसा छात्रों के एक हाथ में कुरान तथा दूसरे हाथ में कंप्यूटर होगा, लेकिन जमीन पर कुछ भी नहीं दिखा। नतीजा यह हुआ कि इस योजना में पढाने वाले शिक्षक ही भूखे मर रहे हैं। इस दौरान सभी ने एक ज्ञापन भी हुमा बानों को सौंपा।

प्रभावी पहल का दिया आश्वासन

हुमा बानों ने इस सम्बन्ध में बताया कि यह पूरे प्रदेश की विकट समस्या है कि इन शिक्षकों को 2017 से उनका मूल वेतन नहीं मिल रहा है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पैनल की सदस्य होने के नाते मेरा कर्त्वय है कि हम इस बता को सरकार तक ले जाएं और इन शिक्षकों को उनका वेतन मिल सके। हम जल्द ही इसमें प्रभावी कदम उठाएंगे ताकि सरकार इसका त्वरित संज्ञान ले।