
योगी सरकार ने आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्वति को दी संजीवनी, बनारस में लाखों मरीज ले रहे स्वास्थ्य लाभ
वाराणसी। प्राचीन चिकित्सा पद्वति यानी आयुर्वेद, जिसे संतो-ऋषिमुनियों ने पहाड़ों पर ईजाद किया और उसे चिकित्सा के क्षेत्र में ले आये। वक्त के साथ-साथ इस पद्वति को भी लोग छोड़कर एडवांस मेडिकल साइंस से इलाज करने लगे पर योगी सरकार ने 6 वर्षों के कार्यकाल में इस पद्वति को एक बार फिर सींच कर एडवांस पद्वति के समकक्ष ला दिया है। लोग इलाज के लिए इस पद्वति का रुख कर रहे हैं। अकेले राजकीय आयर्वेदिक अस्पताल एवं कालेज चौकाघाट, बनारस में 5 साल में 1 लाख से अधिक मरीज अपना इलाज करवा चुके हैं।
कोरोना काल में सिद्ध हुई सार्थकता
आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ अरविन्द कुमार सिंह ने बताया कि साल 2020 में जब कोरोना की विभीषिका आयी तो डब्ल्यूएचओ ने रिसर्च के बाद जिस चीज सुरक्षा कवच बताया वह था हर्बल काढ़ा, यह काढ़ा भारत की आयर्वेदिक पद्वति में सदियों से बनाया जा रहा है। कोरोना काल में केंद्र के आयुष विभाग ने काढ़ा और कई सारी इम्यूनिटी बूस्टर आयुर्वेद में तैयार करवाया और लोगों ने इसका लाभ लिया। लोग स्वाथ्य और मजबूत हुए।
डबल इंजन की सरकार ने विश्व में दिलाई पहचान
उत्तर प्रदेश के आयुष मंत्री डॉ दयाशंकर मिश्र दयालु ने बताया कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्वति है। इसकी प्रतिष्ठा कालांतर में कहीं खो गयी थी। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद पर पूर्व की सरकारों द्वारा ध्यान नहीं देने से भारत के ऋषि मुनियों की तपस्या और शोध का परिणाम अमृत रूपी आयुर्वेद चिकित्सा खत्म होने की कगार पर थी। ऐसे में डबल इंजन की सरकार ने प्राचीन चिकत्सा उपचार को एक बार भारत में ही नहीं बल्कि विश्व में नई पहचान दिलाते हुए कोरोना काल में इसकी सार्थकता सिद्ध कर दी है। वाराणसी में अकेले राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में 2017 से 2022 तक 5 लाख से अधिक मरीजों ने उपचार कराया है।
आयुष काढ़े ने बढ़ाई इम्यूनिटी
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के रिसर्च से तैयार आयुष काढ़े ने कोरोना काल में अपना मुकाम हासिल किया। पूरी दुनिया में इसकी चर्चा ही नहीं बल्कि इसका इस्तेमाल भी किया गया और इसे सराहा भी गया। आयुष मंत्री डॉ दयाशंकर मिश्र दयालु ने कहा कि हमारी सरकार भारत के प्राचीन स्वरुप को संजोते हुए उसे विश्व गुरु बनाने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।
आयुर्वेदिक कालेज की ओपीडी में लगती है भीड़
राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ अरविन्द कुमार सिंह ने बताया कि यहां हर साल मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। खासकर कोरोना काल में आयुर्वेद के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है। वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान ओपीडी की संख्या 48,246 थी। आयुर्वेदिक दवाओं का प्रभाव ऐसा रहा कि 2021 कोरोना के काल में मरीजों की संख्या 75,772 पहुंच गई। जो 2022 में एक लाख के पार पहुंच गई। 2017 से 2022 तक 5,26,162 मरीजों ने उपचार कराया।
Updated on:
05 Apr 2023 07:42 am
Published on:
05 Apr 2023 07:41 am
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