
Hindu Dharma: भारत के बहुत से राज्यों में घरों की महिलाएं कद्दू नहीं काटती हैं। पहले घर के पुरुष कद्दू को काटते हैं या फिर उसे दो टुकड़ा करते हैं। उसके बाद महिलाएं उसे सब्जी के लिए काटती हैं। क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों है? तो आइए जानते हैं, क्या इसके पीछे की वजह।
कद्दू काटना यानि बड़े बेटे की बलि देने जैसा
हिंदू समुदाय में कद्दू ये कुम्हड़ा का पौराणिक महत्व भी है। सनातन धर्म में कई धार्मिक अनुष्ठानों में जहां पशुबलि नहीं दी जाती है, वहां कद्दू को पशु के प्रतीक रूप में बलि दी जाती है। कई समुदायों या इलाकों में यह मान्यता है कि कद्दू बड़े बेटे जैसा होता है और अगर महिलाएं उसे काटती हैं तो यह बेटे की बलि देने जैसा होगा। इसलिए महिलाएं कद्दू को पहले किसी पुरुष से काटवाने के बाद ही काट सकती हैं।
कद्दू को धन और स्वास्थ्य के प्रतीक के रूप में भी उपयोग किया जाता है। यह इसलिए भी पवित्र माना जाता है, क्योंकि माना जाता है कि भगवान गणेश एका-मकुता पहनते हैं, जिसमें माणिक या पन्ना से जड़ी एक बड़ी सुनहरी बाली शामिल होती है।
कद्दू की विशेषताएं (Pumpkin Features)
कद्दू ऐसी सब्जी है, जिसके पत्ते, फूल, फल और डालियों का इस्तेमाल भी व्यंजन तैयार करने के लिए किया जाता है। कद्दू से कई तरह के व्यंजन जैसे पकौड़े, सब्जी, सूप और सांभर आदि तैयार किए जाते हैं। वहीं, आयुर्वेद में इसे औषधीय फल के रूप में महत्व दिया गया है। तमाम तरह की विशेषताओं वाले इस सब्जी के लिए एक विशेष दिन भी तय किया गया है। 29 सितंबर को विश्व कुम्हड़ा दिवस (World Pumpkin Day) मनाया जाता है।
नोट: यहां दी गई सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। patrika.com किसी भी तरह की मान्यता और जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
Published on:
18 Sept 2023 02:11 pm
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