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महाशिवरात्रि 2022 पर लगातार 44 घंटे मिलेगा बाबा विश्वनाथ का दर्शन

महाशिवरात्रि पर लगातार 44 घंटे बाबा का दर्शन पूजन होगा। मंदिर का कपाट 28 फरवरी व एक मार्च को भोर में ढाई बजे मंगला आरती के लिए खुलेगा। फिर दो मार्च की रात शयन आरती तक दर्शन-पूजन जारी रहेगा। महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती विवाह भी होगा। ऐसे में मान्यता है कि इस विवाह में समस्त देवी-देवता भी मौजूद रहते हैं। लिहाजा कोई द्वार बंद नहीं किया जाता।

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श्री काशी विश्वनाथ  (फाइल फोटो)

श्री काशी विश्वनाथ (फाइल फोटो)

वाराणसी. भगवान शिव की नगरी काशी में महाशिवरात्रि 2022 पर बाबा विश्वनाथ के लगातार 44 घंटे होंगे दर्शन-पूजन। इसकी शुरूआत पहली मार्च की भोर ढाई बजे से होगी। सबसे पहले बाबा की मंगला आरती होगी उसके बाद आम भक्तों के लिए बाबा का पट दर्शनार्त खोल दिया जाएगा। उसके बाद दो मार्च की रात शयन आरती तक भक्तों को बाबा का दर्शन मिलता रहेगा। हालांकि कोई भी भक्त बाबा के गर्भगृह के भीतर नहीं जा सकेगा। बाबा विश्वनाथ के शिवलिंग को जल या दूध आदि चढ़ाने के लिए गर्भगृह के चारों दिशाओं में बने द्वार पर ही अरघे का इंतजाम किया जाएगा।

मंदिर प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक महाशिवरात्री पर मंगलवार को दिन भर बाबा की नियमित आरती होती रहेगी। रात के चारो प्रहर में मंदिर का महंत परिवार पारंपरिक रूप से शिव-पार्वती विवाह की रस्म पूरी करेंगे। वैसे विवाह की रस्म रात आठ बजे आरंभ होगी जो अगले दिन भोर के चार बजे तक चलेगी। इस दौरान बाबा की चार प्रहर की आरती का क्रम भी जारी रहेगा।

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महंत परिवार के मुताबिक मान्यता है कि भगवान शिव-पार्वती के विवाह के दौरान समस्त देवी-देवता भी उपस्थित रहते हैं। यही कारण है कि इस दौरान काशी विश्वनाथ के सभी शिवालयों के पट बंद नही किए जाते।

कल होगी हल्दी की रस्म
विवाह के लिहाज से बाबा को सबसे पहले हल्दी लगाई जाएगी। यह रस्म रविवार को मनाई जाएगी। ये सारी प्रक्रिया महंत डॉ कुलपति तिवारी के आवास पर होगी।

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