मत्स्य उत्सव के आखिरी दिन बॉलीवुड सिंगर अमित मिश्रा ने अपनी मखमली आवाज का जादू बिखेरा। पुराने और नए हिंदी फिल्मी सॉन्ग पर उन्होंने अलवर राइट्स को झूमने पर मजबूर कर दिया। तेज सर्दी के बीच लोग उनके गानों पर नाचते नजर आए। करीब डेढ़ घंटे तक मिश्रा ने अपनी गीतों से लोगों को बांधे रखा। इस दौरान उन्होंने केसरिया बालम गीत सुनाकर सभी का अभिवादन भी किया।
मिश्रा ने कार्यक्रम की शुरुआत हमा, हमा गीत से की। इसके बाद दिल चाहता है और तेरी मेरी कहानी गीत सुनाकर लोगों की तालियां बटोरी। फुल एनर्जी के साथ मिश्रा ने लगातार एक से बढ़कर एक गीत सुनाकर श्रोताओं का मन मोह लिया। उन्होंने शुरुआत में दूसरे सिंगर्स के फेमस गीत गाए।
मितवा, जो भेजी थी दुआ, ओ हमदम सुनियो रे…
इनमें मितवा, जो भेजी थी दुआ, ओ हमदम सुनियो रे…जैसे सुप्रसिद्ध गीत सुनाए। इसके बाद उन्होंने खुद के गाए गीत गुनगुनाए तो पूरा महल चौक तालियों और सिटी से गूंज उठा। मिश्रा ने फिल्म ए दिल है मुश्किल का सॉन्ग मेरी रूह का परिंदा फड़फड़ाए… सुनाया तो उनकी जादुई आवाज का हर कोई कायल हो गया। इसके बाद उन्होंने मन मा इमोशन जागे रे, यही उमर है कर ले गलती से मिस्टेक…सुनाकर गीतों की झड़ी लगाई। कार्यक्रम में जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरेंद्र सिंह, एडीएम सिटी बीना महावर, यूआईटी सचिव स्नेहल नाना, एसडीएम प्रतिक जुईकर, नगर निगम आयुक्त जितेंद्र नरूका सहित अनेक अधिकारी मौजूद थे।
पुराने गीतों को नए अंदाज में पेश किया
अमित ने पुराने गीतों को अपनी सुमधुर आवाज में बिलकुल नए अंदाज में पेश किया तो युवा भी उनके साथ गुनगुनाते नजर आए। उन्होंने बचना ऐ हसीनो, ओ मेरे दिल के चैन, ये जवानी है दीवानी, आई एम ए डिस्को डांसर, ये काली-काली आंखें, ऐसी दीवानगी देखी नहीं कहीं, कोई मिल गया मेरा दिल गया, दिल है मेरा दीवाना क्या कहता है अब घबराना क्या, झूम बार बार झूम जैसे सॉन्ग में अपनी दमदार आवाज से सभी का दिल जीत लिया।