जिले का प्रसिद्ध सरिस्का टाइगर रिजर्व प्रवासी पक्षियों से आबाद होने लगा है। हालांकि, सरिस्का आमतौर पर सर्दियों में इन दिनों तक प्रवासी पक्षियों से गुलजार हो जाता है, लेकिन इस साल मौसम में बदलाव के कारण प्रवासी पक्षियों के आने में देरी हो रही है।
सरिस्का टाइगर रिजर्व में रूस, कजाकिस्तान, उत्तरी अफ्रीका और दक्षिण-पूर्वी यूरोप से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर विभिन्न प्रजाति के पक्षी हर साल आते हैं। इनमें से अधिकतर पक्षी नवंबर महीने में सरिस्का पहुंच जाते हैं और मार्च तक यहां रहते हैं। लेकिन इस साल दिन के तापमान में बढ़ोतरी होने के कारण पक्षियों के आने में देरी हो रही है।
सरिस्का टाइगर रिजर्व न केवल बाघों, बाघिनों और पैंथरों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां आने वाले प्रवासी पक्षी भी पर्यटकों को खूब आकर्षित करते हैं। नवंबर से मार्च तक पर्यटक दूर-दूर से यहां आकर बाघों के साथ-साथ इन प्रवासी पक्षियों को देखने आते हैं।
सरिस्का डीएफओ अभिमन्यु सहारण ने बताया कि आमतौर पर करना का बास, काकंवाडी, क्रॉसका और वाटर होल जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी जैसे कि बार, हेडेड, गूज, और रूडी शेलडक देखे जाते हैं। लेकिन इस साल इन पक्षियों की संख्या अपेक्षाकृत कम है।
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