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आचार्य सुनील सागर ने कहा- भारत ही हमारी संस्कृति का केंद्र, इंडिया कहना गलत

आरएसएस अजयमेरू महानगर का एकत्रीकरण कार्यक्रम

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अजमेर. हमने कभी किसी संस्कृति का हरण नहीं किया है। हम संस्कृति को खोना नहीं चाहते हैं। इसकी रक्षा करना प्रत्येक भारतीय का कर्त्तव्य होना चाहिए। यह बात आचार्य सुनील सागर ने रविवार को वैशालीनगर छतरी योजना में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अजयमेरू महानगर एकत्रीकरण कार्यक्रम में कही।

उन्होंने कहा कि वसुधैव कुटुम्बकम, जीओ और जीने दो.., मानव कल्याण, मातृवंदन और वैदिक संस्कृति हमारे मूल आधार हैं। हमें एकांत मुद्रा को छोड़कर अनेकांत पर ध्यान देना जरूरी। यह भरत और शकुंतला तथा ऋषि-मुनियों का देश है। भारत ही हमारी संस्कृति का केंद्र है। इसे इंडिया कहना गलत है। इस दौरान स्वयं सेवकों ने वेणु वादन किया। कार्यक्रम में 1485 स्वयंसेवक शामिल हुए।

अजमेर रहा है संस्कृति का केंद्र

अढ़ाई दिन का झौंपड़ा अजमेर और देश की प्राचीन संस्कृति का केंद्र रहा है। कई बार इसके धार्मिक इतिहास के बारे में सुना और पढ़ा था। अजमेर आने पर प्राचीन संस्कृति के दर्शन की इच्छा जागृत हुई। वहां की सनातन और दिगंबर मुद्रा को क्यों छुपाया जाना चाहिए। हम संस्कृति को खोना नहीं चाहते। वास्तव में हमें प्राचीन धरोहर, पुरा सम्पदा और इतिहास के दर्शन करने चाहिए।

संस्कृति को बिगाड़ रहा लव जेहाद

आचार्य सुनील सागर ने कहा कि लव जेहाद भारतीय संस्कृति को छिन्न-भिन्न कर रहा है। बेटियों को माता-पिता के प्रति कर्त्तव्य को समझना होगा। कर्तव्य बोध की पहचान होना जरूरी है। तनाव और हिंसा की कोई जगह भारतीय संस्कृति में नहीं है। ऋषि-मुनियों के देश के लिए बाहरी व्यक्ति कभी नहीं सोच सकता है।

हिंदी भाषा हमारा गौरव
अंग्रेजी भाषा की तरफ लोगों में आकर्षण है। इसमें संवाद करना उच्चतम पैमाना समझा जाता है। हिंदी भाषा हमारा गौरव है। अंग्रेजी में संवाद की बजाय आप रुख हिंदी की तरफ मोड़ दो। हर भाषा अपने स्थान पर ठीक है, लेकिन भारत में हिंदी बोलकर गर्व महसूस करना चाहिए।

सबका डीएनए एक

सनातन पद्धति हमारी व्यवस्था है। जैन धर्म के 20 तीर्थंकर भगवान राम के इक्ष्वाकु वंश के रहे हैं। जैन भी हिंदू हैं। सबका डीएनए एक रहा है। किसी को भी इस व्यवस्था में छेड़खानी का अधिकार नहीं है। जब हम अपनी मर्यादाओं का पालन करते हैं तो दूसरों से भी यही उम्मीद करते हैं। हमें क्या करना है उसे सीखने की आवश्यकता नहीं है। भगवान राम 500 साल बाद मूल अवस्था में विराजमान हो गए। काफी कुछ जो अस्त व्यस्त हुआ है उसे सुधारना आवश्यक है।

पुस्तक का विमोचन

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, प्रांत संघचालक जगदीश राणा, विभाग प्रचारक शिवराज आचार्य, सुनील जैन, पुखराज पहाड़िया ने आचार्य सुनील सागर के जीवन वृतांत पर आधारित विज्ञान भवन से पुस्तक का विमोचन किया। इसमें राष्ट्रीय संस्कारों सहित अन्य का जिक्र किया गया है। बड़ा धड़ा पंचायत के प्रदीप पाटनी, बसंत सेठी, अरुण सेठी, मनीष सेठी आदि मौजूद रहे। संचालन संदीप बोहरा ने किया।