
अजमेर. भाजपा शहर अध्यक्ष अरविंद यादव का कहना है कि शहर या देहात अध्यक्ष की ओर से टिकट के लिए दावेदारी जताना निरर्थक होगा। उनका कहना है कि जब पार्टी ने स्पष्ट ही कर दिया कि किसी जिलाध्यक्ष को टिकट नहीं मिलेगा तो फिर दावेदारी करने का क्या औचित्य।
प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश…
लोकसभा उपचुनाव में पार्टी की हार के क्या कारण रहे?
तात्कालिक कारण थे, कोई स्थायी कारण नहीं थे। उपचुनाव में हार-जीत से हालांकि कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन जो भी कारण रहे, उन्हें दूर किया गया है। उपचुनाव के परिणाम के बाद पार्टी ने पूरी सजगता के साथ बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत किया है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्रों में बूथ इकाइयों को सक्रिय किया गया है।
किस विधानसभा क्षेत्र से कितने लोग दावेदारी जता रहे हैं?
अजमेर शहर में फिलहाल दक्षिण से 11 और उत्तर से 9 लोगों के बायोडेटा मिले हैं। दावेदारी जताने का सबको अधिकार है और सभी इसी विश्वास के साथ दावेदारी कर रहे हैं कि टिकट जिसे भी मिले, सामूहिक जिम्मेदारी लेकर पार्टी प्रत्याशी की जीत के लिए काम करेंगे।
एंटी इंकबेंसी फेक्टर से कैसे निपटेंगे?
राजस्थान या अजमेर में ऐसा बिल्कुल नहीं है। इसलिए इसके लिए अलग से तैयारी करने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। शहर या देहात अध्यक्ष का टिकट मांगना कहां तक सही है?पार्टी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जिलाध्यक्ष को टिकट नहीं मिलेगा। ऐसे में जिलाध्यक्ष के टिकट मांगने का कोई औचित्य ही नहीं है।
वर्तमान विधायकों के टिकट कटने चाहिए या नहीं?
सभी विधायकों ने निष्ठा के साथ जनसेवा की है। टिकट की प्रक्रिया क्या रहेगी, यह चुनाव संचालन कमेटी जो भी तय करेगी वह सर्वमान्य होगा।
विधानसभा चुनाव को लेकर क्या तैयारियां हैं?
प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में संचालन समितियां बनाई गई हैं। प्रत्येक वर्ग तक भाजपा की रीति-नीति और विकास की बात पहुंचे, इसके लिए अलग-अलग सम्मेलनों का आयोजन किया गया है। अक्टूबर महीने की रूपरेखा तैयार की गई है, इसके तहत नव शक्ति सम्मेलन होंगे। प्रत्येक कार्यकर्ताओं को काम मिले। इसके लिए पूर्व कार्यकर्ताओं को भी कोई ना कोई जिम्मेदारी दी जा रही है। दो से चार नवम्बर तक महासम्पर्क अभियान के तहत प्रत्येक घर को टच किया जाएगा।