11 मार्च 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अजमेर

Navratra: जयकारों के साथ मैया की मूर्तियां का विसर्जन

लोगों ने अम्बे मैया के साथ भगवान गणेश और अन्य मूर्तियों की पूजा अर्चना की। बाद में उन्हें कुंड में विसर्जित किया गया।

Google source verification

अजमेर.

ढोल-ढमाकों और डीजे की धुनों पर नाचते-गाते हुए लोगों ने मंगलवार को अम्बे मैया (ambey mata) की मूर्तियों का विसर्जन (dispersion) किया। आजाद पार्क में बनाए गए कुंड में मूर्तियों का विसर्जन हुआ।

read more: बिना फूड लाइसेंस चल रही गजक व पेठा फैक्ट्री की मशीनें सीज

शारदीय नवरात्र के तहत नगर निगम (nagar nigam ajmer) के तत्वावधान में पटेल मैदान में अम्बे मैया की मूर्ति स्थापित (establish) की गई। महापौर धर्मेन्द्र गहलोत, उपायुक्त गजेंद्र सिंह रलावता और पार्षदों ने विधि-विधान से मूर्ति का पूजन (worship) किया। इसके बाद जयकारों के साथ मूर्ति का कुंड में विसर्जन हुआ। वैशाली नगर, रामगंज, तोपदड़ा, केसरगंज, नाका मदार, आदर्श नगर, नसीराबाद रोड, शांतिपुरा और शास्त्री नगर इलाके में लोग टेम्पो (tempo), हाथ ठेले (vendor) और वाहनों पर अम्बे मैया की मूर्तियों को लेकर निकले। ढोल-ढमाकों और गीतों (music) पर नृत्य किया।

read more: RPSC: वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी परीक्षा 9 अक्टूबर से

यही माहौल राजीव कॉलोनी, भक्तिधाम माकड़वाली रोड, पंचशील, हरिभाऊ उपाध्याय नगर, फायसागर रोड पर नजर आया। लोगों ने अम्बे मैया के साथ भगवान गणेश (lord ganesha) और अन्य मूर्तियों की पूजा अर्चना की। बाद में उन्हें कुंड में विसर्जित किया गया।

read more: amazing-ramleela : अजमेर : यहां टल्ली होकर आता है रावण

सडक़ों पर गुलाल

माता की मूर्तियों के विसर्जन के दौरान लोगों ने एकदूसरे और राहगीरों को गुलाल (colour) लगाया। आजाद पार्क और उसके आसपास के इलाके में मेले (local fair) जैसा माहौल दिखा। यहां लोग दोपहिया-चौपहिया वाहनों में भी दुर्गा मैया की मूर्तियों को विसर्जित (dispersion) करने पहुंचे। इस दौरान कई लोग भावुक भी हो गए। जयकारों से समूचा इलाका गूंज उठा। विसर्जन के बाद लड्डू, पेड़े का प्रसाद भी बांटा गया।

read more: Dussehra Festival : रेनकोट पहनकर 65 फीट का रावण जलेगा आज

महिलाओं ने लगाया सिंदूर
कचहरी रोड स्थित बंगाली धर्मशाला में बंगाली समाज (bengal cummunity) ने पारम्परिक रूप से दुर्गा-काली मैया (durga-kali mata) की पूजा की गई। महिलाओं ने दुर्गा मैया और एकदूसरे को पारम्परिक सिंदूर (traditional colour) लगाया। यहां पूजा-अर्चना के बाद माता को भोग लगाया गया। बाद में आरती कई गई।

read more: दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान पैर फिसलने पर लूणी नदी में डूबने से 3 की मौत, 1 गंभीर