
अजमेर. ख्वाजा साहब की दरगाह में उर्स के मौके पर दिन भर कव्वालियों का दौर चल रहा है। कोई आहता-ए-नूर में तो कोई पायंती दरवाजे के सामने बैठ कर ‘यह तो मेरे ख्वाजा का करम है…’ जैसे सूफियाना कलामों पर अकीदतमंद को झूमने पर मजबूर कर रहा है तो कोई अपने स्तर पर कव्वालियों का आयोजन कर रहा है। खादिम सैयद कुतुबुद्दीन सकी की गद्दी पर रविवार रात को हुई महफिल में एक नन्हे कव्वाल ने सूफियाना बयार बहाई तो वहां सुनने वालों का मजमा लग गया। हिंगोली (महाराष्ट्र) से आए 9 वर्षीय कव्वाल अबु जैर ने ‘तेरे टुकड़ों पर पलते हैं ख्वाजा पिया, हमसे अपने भी जलते हैं ख्वाजा पिया… ’ कलाम सुनाया। अबु पिछले पांच सालों से ख्वाजा के दर पर सूफियाना कलाम गाकर अकीदत पेश कर रहा है।