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दो माह बाद आया गरीब का निवाला, 45 डिग्री तापमान में सुबह 6 से शाम 5 बजे तक लगी रही भीड़…देखें यह वीडियों

गोविंदगढ़ नगर पालिका में खाद्य सुरक्षा में 2147 परिवार के 8946 सदस्य हैं पात्र, इन्हें नि:शुल्क गेहूं का किया जाता है वितरण। दो महीने से नहीं मिल रहा था यह गेहूं।

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गोविन्दगढ़. नगर पालिका क्षेत्र में दो माह बाद नि:शुल्क मिलने वाला गेहूं राशन की दुकानों पर गुरुवार को पहुंचा है। शुक्रवार को इसका वितरण भी किया गया तो राशन की दुकानों पर सुबह 6 से शाम 5 बजे तक लंबी कतार लगी रही। महिला-पुरुष, वृद्ध और बच्चे सुबह से लेकर शाम तक कतार में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। इधर भरी दोपहरी में राशन की दुकानों पर छाया और पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के बाद भी लाइन कम नहीं हुई।

खाद्य सुरक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार गोविंदगढ़ नगर पालिका में खाद्य सुरक्षा में 2147 परिवार के 8946 सदस्यों को नि:शुल्क गेहूं का वितरण किया जाता है। पात्र सभी लाभार्थियों की ओर से राशन कार्ड के साथ राशन की दुकानों पर पहुंचकर गेहूं को प्राप्त करना होता है।

खत्म न हो जाए, इस आशंका में भीड़

राशन डीलरों के अनुसार क्षेत्र में दो माह बाद गेहूं आया है। खाद्य सुरक्षा में गेहूं प्राप्त करने वाले लाभार्थियों को अंदेशा रहता है कि कहीं गेहूं खत्म न हो जाए। ऐसे में वितरण शुरू होने से पहले ही दुकान पर कतार में लग जाते हैं। दो माह से वे गेहूं का इंतजार कर रहे थे। इसलिए राशन की दुकानों पर भीड़ लग रही है। हर उपभोक्ता अपने हिस्से का गेहूं जल्दी ले जाना चाहता है। हालांकि सभी को गेहूं उपलब्ध कराया जाता है।

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सबको गेहूं मिल जाएगा

इस मामले में निरीक्षक रसद विभाग, लक्ष्मणगढ़़ के कृष्णकुमार वायला ने बताया कि राशन की दुकानों पर गेहूं पहुंच चुका है, जिसका वितरण करवाया जा रहा है। गेहूं वितरण को लेकर समय भी बढ़ा दिया गया है। सभी को गेहूं मिल जाएगा।

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मुझे गेहूं मिल गया, मैं खुश हूं

खाद्य सुरक्षा की लाभार्थी राम बाई ने बताया कि हमारा परिवार राशन के गेहूं पर ही निर्भर है। एक महीने से गेहूं नहीं आया था तो बाजार से खरीद कर गेहूं खाया था। राशन का गेहूं खत्म न हो जाए, इसलिए सुबह 6 बजे ही आ गई थीं। घर के सारे काम छोड़कर अब मुझे गेहूं मिल गया। मैं खुश हूं।

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राशन के गेहूं से ही गुजारा

लाभार्थी मनीष खत्री ने बताया कि राशन डीलर के पिछले कई महीने से चक्कर लगा रहे थे। गेहूं नहीं आ रहा था। आज गेहूं वितरण किया था, तो हम भी गेहूं लेने के लिए आ गए। हमारा परिवार राशन के गेहूं से ही गुजारा करता है।